
जामा मस्जिद के शाही इमाम सैय्यद अहमद बुखारी कोर्ट में पेश हुए (Img: Dynamite News)
Muzaffarnagar: मुजफ्फरनगर में वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आचार संहिता उल्लंघन से जुड़े मामले में दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम सैय्यद अहमद बुखारी शुक्रवार, 24 जुलाई 2026 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत में पेश हुए। गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद उन्होंने अदालत में उपस्थित होकर वारंट रिकॉल करने की अर्जी दी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही अब मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया शुरू हो गई है।
जानकारी के अनुसार, यह मामला वर्ष 2007 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का है। बताया गया कि 28 मार्च 2007 को खतौली विधानसभा क्षेत्र में यूडीएफ प्रत्याशी शाकिर अली के चुनाव प्रचार के दौरान शाही इमाम सैय्यद अहमद बुखारी हेलीकॉप्टर से पहुंचे थे। उस समय जिले में चुनाव आचार संहिता लागू थी। आरोप है कि बिना अनुमति हेलीकॉप्टर उतारने के कारण शाही इमाम सैय्यद अहमद बुखारी, तत्कालीन प्रत्याशी शाकिर अली और आयोजक मोहम्मद इनाम कुरैशी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
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मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में लगातार पेश नहीं होने पर जनपद की सीजेएम कोर्ट ने शाही इमाम अहमद बुखारी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। वारंट जारी होने के बाद शुक्रवार को वह स्वयं अदालत पहुंचे और अपने गैर-जमानती वारंट को निरस्त करने के लिए अर्जी दाखिल की। अदालत ने उनकी अर्जी स्वीकार करते हुए गैर-जमानती वारंट रिकॉल कर दिया। इसके बाद वह दिल्ली के लिए रवाना हो गए।
कोर्ट परिसर में मौजूद मीडिया ने शाही इमाम से मामले को लेकर बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने किसी भी सवाल का जवाब देने से साफ इनकार कर दिया। अदालत से औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद वह बिना कोई बयान दिए वहां से चले गए।
शाही इमाम के अधिवक्ता कैलाश सिंह ने बताया कि यह मामला वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव का है। उनके अनुसार, खतौली विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी साबिर अली के चुनाव प्रचार के दौरान तीन लोगों के नाम इस मामले में शामिल थे, जिनमें मोहम्मद इनाम कुरैशी, साबिर और शाही इमाम सैय्यद अहमद बुखारी शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि आरोप यह था कि शासन की अनुमति के बिना हेलीकॉप्टर उतारा गया था। अधिवक्ता के मुताबिक, मोहम्मद इनाम कुरैशी और साबिर पहले ही अदालत में पेश हो चुके थे, जबकि शाही इमाम के खिलाफ वारंट जारी था। उसी वारंट के संबंध में वह शुक्रवार को अदालत पहुंचे थे।
अधिवक्ता कैलाश सिंह ने कहा कि मामला वर्ष 2007 का है और गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद ही शाही इमाम अदालत में पेश हुए। अब अदालत द्वारा वारंट निरस्त किए जाने के बाद इस मामले में आगे की न्यायिक कार्रवाई नियमानुसार जारी रहेगी।
Location : Muzaffarnagar
Published : 24 July 2026, 8:51 PM IST