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मां कूष्मांडा की पूजा से जुड़ी है खास मान्यता (Img- Dynamite News)
Mirzapur: नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब मां कूष्मांडा ने अपनी हल्की सी मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसी वजह से उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति भी कहा जाता है। मान्यता है कि मां की पूजा करने से भक्तों को सुख, समृद्धि, अच्छी सेहत और जीवन में आगे बढ़ने का आशीर्वाद मिलता है।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, मां कूष्मांडा का तेज सूर्य के समान है। उनका निवास सूर्यमंडल के भीतर माना जाता है। मां की आठ भुजाएं हैं, इसलिए उन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र और गदा हैं। आठवें हाथ में जपमाला रहती है। मां का वाहन सिंह है। भक्त मां के इसी स्वरूप की पूजा कर उनसे सुख और खुशहाली की कामना करते हैं।
मिर्जापुर जिले का विंध्याचल धाम देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है। यहां मां विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्त पहुंचते हैं। धार्मिक परंपरा के अनुसार, नवरात्रि के चौथे दिन मां विंध्यवासिनी की पूजा मां कूष्मांडा के रूप में की जाती है। मंदिर परिसर में माता के जयकारों के बीच श्रद्धालु दर्शन और पूजन करते हैं। भक्त मां से परिवार की खुशहाली और जीवन की परेशानियां दूर करने की प्रार्थना करते हैं।
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विंध्याचल धाम के विद्वान पुरोहित पं. राजन मिश्र के अनुसार, मां कूष्मांडा की आराधना गृहस्थ जीवन जीने वाले लोगों के लिए भी खास मानी जाती है। धार्मिक विश्वास है कि मां अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं और उनके जीवन में सुख-समृद्धि लाती हैं। भक्त मां के सामने अपनी परेशानियां रखकर उनसे परिवार की रक्षा, तरक्की और शांति की प्रार्थना करते हैं।
विंध्याचल धाम में देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु मां विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भक्त लंबी कतारों में लगकर माता के दर्शन करते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि मां के दरबार में आकर मन को शांति मिलती है और नई ऊर्जा का अनुभव होता है। नवरात्रि के दौरान मां के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व है। मां कूष्मांडा की आराधना भी इसी आस्था का अहम हिस्सा है।
Location : Mirzapur
Published : 14 October 2026, 3:47 PM IST