गाड़ी मिर्जापुर में है साहेब… फर्जी नंबर प्लेट के खेल में फंसा गरीब मजदूर, वाराणसी से कट रहे ई-चालान

मिर्जापुर जिले के एक मजदूर के लिए डिजिटल चालान व्यवस्था बड़ी परेशानी बन गई है। उनकी बाइक घर पर खड़ी रहती है, लेकिन वाराणसी में उसी नंबर की फर्जी प्लेट लगाकर चल रही दूसरी बाइक पर लगातार ई-चालान कट रहे हैं। कई बार शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 21 August 2026, 3:31 PM IST

Mirzapur: मिर्जापुर के लालगंज कोतवाली क्षेत्र के रेही गांव निवासी गंगासागर दूसरे के यहां कपड़ा सिलाई का काम कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उनका कहना है कि उनकी बाइक अधिकांश समय घर पर ही खड़ी रहती है और उसका बहुत कम उपयोग होता है। इसके बावजूद उनके मोबाइल पर वाराणसी से लगातार ई-चालान की सूचना आ रही है।

हाल ही में वाराणसी यातायात पुलिस की ओर से उन्हें फोन कर वाहन के बारे में जानकारी मांगी गई। गंगासागर ने बताया कि उनकी बाइक मिर्जापुर स्थित घर पर ही खड़ी है। इसके बाद पता चला कि उनके वाहन नंबर पर दो हजार रुपये से अधिक का चालान दर्ज हो चुका है।

फर्जी नंबर प्लेट लगाकर चल रही दूसरी बाइक

जांच में सामने आया कि किसी अन्य व्यक्ति ने गंगासागर की बाइक का नंबर अपनी मोटरसाइकिल पर लगा रखा है। पीड़ित के अनुसार उनकी वास्तविक बाइक एचएफ डीलक्स है, जबकि चालान जिस वाहन पर हो रहा है वह दूसरे मॉडल की बाइक है। इसके बावजूद कैमरों में दर्ज नंबर के आधार पर चालान उनके नाम पर जारी किए जा रहे हैं।

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शिकायत के बाद भी नहीं मिली राहत

गंगासागर ने बताया कि यह पहली बार नहीं हुआ है। पहले भी इसी तरह उनके नाम पर चालान कट चुके हैं। उन्होंने वाराणसी पुलिस को अपनी बाइक के दस्तावेज और फोटो भेजकर मामले की जानकारी दी, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ।

उन्होंने लहंगपुर पुलिस चौकी में भी शिकायत दर्ज कराई। वहां से उन्हें मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत करने की सलाह दी गई। उन्होंने ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

हर जगह जाकर सफाई देना संभव नहीं

पीड़ित का कहना है कि वह मजदूरी करके परिवार का खर्च चलाते हैं। ऐसे में हर बार मिर्जापुर से वाराणसी जाकर अपनी बेगुनाही साबित करना उनके लिए संभव नहीं है। उनका कहना है कि जब उनका वाहन मिर्जापुर में पंजीकृत है और उसके दस्तावेज उपलब्ध हैं, तो संबंधित विभाग को जांच कर फर्जी नंबर प्लेट लगाने वाले के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

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डिजिटल व्यवस्था पर उठे सवाल

स्थानीय अधिवक्ता प्रभाशंकर दुबे का कहना है कि यह मामला फर्जी नंबर प्लेट के बढ़ते खतरे और ई-चालान प्रणाली की सटीकता पर सवाल खड़ा करता है। उनका मानना है कि ऐसी शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि निर्दोष लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग कब तक इस मामले की जांच पूरी कर पीड़ित को राहत दिलाता है।

Location :  Mirzapur

Published :  21 August 2026, 3:31 PM IST