Mirzapur: कुर्सी के रोब में हदें पार? कृषि विभाग के कर्मियों ने खोला मोर्चा, अफसर की प्रताड़ना के खिलाफ सड़क पर उतरे कर्मचारी

मिर्जापुर कृषि विभाग में कर्मचारियों ने संयुक्त कृषि निदेशक पर मानसिक उत्पीड़न, अभद्र व्यवहार और मनमानी के आरोप लगाते हुए सामूहिक शिकायत भेजी है। अधिकारी ने सभी आरोपों को खारिज किया है। अब पूरे मामले में निष्पक्ष जांच होगी या नहीं, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 4 August 2026, 4:46 PM IST

Mirzapur: विंध्याचल मंडल के कृषि विभाग में इन दिनों खेतों की हरियाली से ज्यादा दफ्तर के भीतर असंतोष की फसल लहलहाती दिखाई दे रही है। जिन हाथों से किसानों की योजनाओं को गति मिलनी चाहिए, वे अब शिकायत पत्र लिखने में व्यस्त हैं। विभाग के कर्मचारियों ने उत्तर प्रदेश के कृषि निदेशक को सामूहिक शिकायत पत्र भेजकर संयुक्त कृषि निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) दीपक चौधरी पर मानसिक उत्पीड़न, अभद्र व्यवहार और मनमानी कार्यशैली अपनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

कर्मचारियों ने लगाए उत्पीड़न और अभद्र व्यवहार के आरोप

कर्मचारियों का कहना है कि कार्यालय में काम का माहौल लगातार तनावपूर्ण होता जा रहा है। आरोप है कि अधिकारी आए दिन कर्मचारियों से अपमानजनक भाषा में बात करते हैं, छोटी-छोटी बातों पर निलंबन की धमकी देते हैं और ऐसा वातावरण बना दिया गया है कि कर्मचारी भय और दबाव में काम करने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि सरकारी कार्यालय में अनुशासन जरूरी है, लेकिन अनुशासन और अपमान के बीच की रेखा अब धुंधली होती जा रही है।

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अवकाश और सेवा संबंधी मामलों में भी मनमानी का आरोप

शिकायत पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि कर्मचारियों के अवकाश संबंधी प्रार्थना पत्रों को अनावश्यक रूप से लंबित रखा जाता है या स्वीकृत नहीं किया जाता। महिला कर्मचारियों के साथ भी उचित व्यवहार न किए जाने का आरोप लगाया गया है। इतना ही नहीं, वार्षिक वेतन वृद्धि और सेवा संबंधी अन्य मामलों में भी अनावश्यक अड़चनें पैदा करने का आरोप लगाया गया है, जिससे कर्मचारियों का मनोबल लगातार गिर रहा है।

कार्यालय संचालन पर भी उठाए सवाल

कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि संयुक्त कृषि निदेशक स्वयं समय पर कार्यालय नहीं पहुंचते, जिससे प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं। शिकायत में उपस्थिति रजिस्टर में कथित हेरफेर, चुनिंदा कर्मचारियों को निशाना बनाकर प्रताड़ित करने तथा कार्यालय संचालन में मनमानी करने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो विभागीय कार्यों पर इसका सीधा असर पड़ेगा और योजनाओं का क्रियान्वयन भी प्रभावित होगा। सामूहिक शिकायत में कृषि निदेशक से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई करने तथा कार्यालय में सम्मानजनक और स्वस्थ कार्य वातावरण बहाल कराने की मांग की गई है। कर्मचारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि कार्यालय में बेहतर कार्य संस्कृति स्थापित करना है।

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अधिकारी ने आरोपों को बताया निराधार

हालांकि, दूसरी ओर संयुक्त कृषि निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) दीपक चौधरी ने कर्मचारियों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं और कुछ कर्मचारियों द्वारा उन्हें बदनाम करने के उद्देश्य से जबरन शिकायत की जा रही है। उन्होंने कहा कि वह नियमों के अनुसार कार्य कर रहे हैं और यदि किसी स्तर पर जांच होती है तो सच्चाई स्वयं सामने आ जाएगी।

जांच पर टिकी सबकी नजर

अब निगाहें कृषि निदेशक की ओर हैं कि शिकायतों की इस "फसल" की निष्पक्ष जांच होती है या फिर यह मामला भी सरकारी फाइलों की उर्वर मिट्टी में दबकर रह जाता है। फिलहाल कृषि विभाग में खेती से ज्यादा चर्चा आरोप, प्रत्यारोप और प्रशासनिक खींचतान की हो रही है। आखिरकार यह तय होना बाकी है कि दफ्तर में अनुशासन की खेती हो रही थी या असंतोष की।

Location :  Mirzapur

Published :  4 August 2026, 4:46 PM IST