हापुड़ के पिलखुवा में 14 वर्षीय नाबालिग लड़की से दुष्कर्म का मामला सामने आया है। पेट दर्द के बाद अस्पताल पहुंचने पर गर्भावस्था का पता चला और बच्ची का जन्म हुआ। आरोपी पड़ोसी मौलाना इस्लाम को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

आरोपी पुलिस की गिरफ्त में
Hapur: जब दरिंदगी भरोसे की दीवारें तोड़कर घर की दहलीज तक पहुंच जाए तो सबसे पहले कुचली जाती है मासूमियत। हापुड़ के पिलखुवा से सामने आई यह घटना रोंगटे खड़े कर देने वाली है, जहां एक पड़ोसी ने 14 साल की लड़की को अपनी हवस का शिकार बनाया। डर, धमकी और चुप्पी के बीच पनपती रही यह घिनौनी साजिश तब सामने आई। जब अचानक पेट दर्द से तड़पती मासूम को अस्पताल ले जाया गया और वहां एक ऐसा सच खुला, जिसने पूरे परिवार को अंदर तक हिला दिया।
पेट दर्द से सामने आया भयानक सच
पीड़िता का परिवार मूल रूप से अमरोहा का रहने वाला है और पिलखुवा में मजदूरी कर अपना गुजर-बसर करता है। परिजनों के मुताबिक 14 फरवरी की रात करीब आठ बजे उनकी बेटी के पेट में अचानक तेज दर्द उठा। घबराए हुए परिजन उसे तुरंत निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि लड़की गर्भवती है। यह सुनते ही परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। बेटी को घर लाया गया और कुछ ही समय बाद उसने एक बच्ची को जन्म दिया। इसी दौरान जब सच्चाई जानने की कोशिश हुई तो मासूम ने पड़ोसी मौलाना इस्लाम का नाम लेकर पूरी कहानी बयां कर दी।
पड़ोसी बना दरिंदा
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि मौलाना इस्लाम उसे घर में अकेला पाकर डराता-धमकाता था और उसके साथ दुष्कर्म करता था। आरोपी ने उसे इस कदर खौफ में रखा कि वह चाहकर भी अपने परिवार को कुछ नहीं बता सकी। कम उम्र होने की वजह से न तो उसे अपनी शारीरिक स्थिति का अंदाजा हो सका और न ही परिवार को भनक लगी। पड़ोस के भरोसे का फायदा उठाकर आरोपी ने इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया और मासूम की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी।
पुलिस की तत्काल कार्रवाई
पीड़िता के पिता की शिकायत पर 17 फरवरी को मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 18 फरवरी को आरोपी मौलाना इस्लाम को गिरफ्तार कर लिया और उसे जेल भेज दिया। कोतवाली प्रभारी के अनुसार, नाबालिग मां और उसकी नवजात बच्ची को वन स्टॉप सेंटर भेजा गया है, जहां दोनों सुरक्षित और स्वस्थ हैं। लड़की का मेडिकल परीक्षण करा लिया गया है और परिजनों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। पुलिस का कहना है कि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई तेजी से की जा रही है।
समाज के सामने बड़ा सवाल
पिलखुवा की यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि उस खामोशी की तस्वीर है, जिसमें डर और बदनामी के चलते मासूम सच छुपा लेती हैं। यह मामला समाज से सवाल करता है कि आखिर कब तक भरोसे की आड़ में दरिंदगी पलती रहेगी और मासूमियत यूं ही कुचली जाती रहेगी।