Meerut Jail: सलाखों के पीछे बज रहे प्यार-जुदाई के तराने, ‘रेडियो परवाज’ पर इन गीतों की सबसे ज्यादा फरमाइश

Meerut Jail में शुरू हुआ Radio Parwaz बंदियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यहां रोजाना फरमाइश पर पुराने फिल्मी गीत बजाए जाते हैं। सबसे ज्यादा प्यार, जुदाई और बेवफाई वाले गीत पसंद किए जा रहे हैं। बंदी एक दिन पहले पर्ची देकर गानों की फरमाइश करते हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 24 August 2026, 11:37 AM IST

Meerut: मेरठ जिला जेल की ऊंची दीवारों और लोहे की सलाखों के बीच इन दिनों पुराने फिल्मी गीत बंदियों के लिए बीते दिनों और अपनों की यादों का सहारा बन रहे हैं। जेल में करीब तीन महीने पहले शुरू हुआ ‘रेडियो परवाज’ अब बंदियों के बीच खासा लोकप्रिय हो गया है। खास बात यह है कि सबसे ज्यादा फरमाइश प्यार, जुदाई और बेवफाई से जुड़े पुराने फिल्मी गीतों की आ रही है।

जेल में गूंजते हैं पसंदीदा फिल्मी गीत

आठ मई से शुरू हुए ‘रेडियो परवाज’ पर रोजाना बंदियों की पसंद के गीत बजाए जाते हैं। जेल की जिंदगी में जहां मनोरंजन के सीमित साधन होते हैं, वहीं संगीत बंदियों को कुछ समय के लिए भावनात्मक सुकून देने का काम कर रहा है।

बंदी एक दिन पहले पर्ची के जरिए अपनी पसंद के गीत की फरमाइश करते हैं। अगले दिन उनकी पसंद का वही गीत रेडियो पर सुनाया जाता है। अपने पसंदीदा गाने का नाम रेडियो पर सुनना बंदियों के लिए खास अनुभव बन गया है।

प्यार और जुदाई के गानों की सबसे ज्यादा मांग

रेडियो परवाज पर आने वाली फरमाइशों में पुराने फिल्मी गीत सबसे आगे हैं। इनमें खास तौर पर प्यार, जुदाई और बेवफाई से जुड़े गीतों की मांग ज्यादा है। ऐसे गीत कई बंदियों को अपने परिवार, दोस्तों और पुराने रिश्तों की याद दिलाते हैं।

किसी के लिए ये गीत बीते रिश्तों की याद बन जाते हैं तो कोई अपनों से दूर होने का दर्द इन धुनों के जरिए महसूस करता है। जेल प्रशासन के मुताबिक संगीत का यह माध्यम बंदियों के बीच सकारात्मक माहौल बनाने में मदद कर रहा है।

जेल प्रशासन ने दी जगह, फाउंडेशन ने तैयार किया सिस्टम

मेरठ के वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के मुताबिक रेडियो स्टेशन के लिए जेल प्रशासन की ओर से जगह उपलब्ध कराई गई है। वहीं ‘इंडिया विजन फाउंडेशन’ ने रेडियो का पूरा तंत्र तैयार किया है।

इस पहल के जरिए बंदियों तक मनोरंजन के साथ-साथ संवाद का एक माध्यम भी पहुंचाया गया है। रेडियो कार्यक्रमों के जरिए जेल के भीतर रहने वाले लोगों को अपनी पसंद और भावनाएं व्यक्त करने का अवसर मिल रहा है।

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सलाखों के पीछे संगीत बना भावनाओं का साथी

‘रेडियो परवाज’ ने जेल की दिनचर्या में एक नया रंग जोड़ दिया है। पुराने गीतों की धुनों के बीच बंदी कुछ पल के लिए अपनी रोजमर्रा की चिंताओं से दूर होकर यादों की दुनिया में चले जाते हैं।

प्यार, जुदाई और रिश्तों से जुड़े गीतों की बढ़ती फरमाइश बताती है कि सलाखों के पीछे भी भावनाएं उतनी ही गहरी हैं। ‘रेडियो परवाज’ अब सिर्फ गीत सुनाने का माध्यम नहीं, बल्कि बंदियों के लिए उनकी यादों और भावनाओं से जुड़ने का जरिया बनता जा रहा है।

Location :  Meerut

Published :  24 August 2026, 11:37 AM IST