शादीशुदा मर्द का लिव-इन रिश्ता अपराध नहीं! इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पढ़ें पूरा मामला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि शादीशुदा व्यक्ति का किसी वयस्क के साथ लिव-इन में रहना अपराध नहीं है। धमकियों से जूझ रहे कपल को कोर्ट ने सुरक्षा दी और गिरफ्तारी पर रोक लगाई। कोर्ट ने साफ किया कि कानून और सामाजिक नैतिकता अलग-अलग हैं और पुलिस का कर्तव्य है कि वह वयस्कों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 27 March 2026, 10:18 PM IST

Allahabad: धमकियों, डर और ऑनर किलिंग की आशंका के बीच एक कपल ने अदालत का दरवाजा खटखटाया… मामला सिर्फ रिश्ते का नहीं था, बल्कि जान बचाने का था। इस पूरे घटनाक्रम में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऐसा फैसला सुनाया, जिसने लिव-इन रिलेशनशिप और कानून के बीच की रेखा को साफ कर दिया।

कानून बनाम सामाजिक नैतिकता

कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि एक शादीशुदा पुरुष का किसी दूसरी वयस्क महिला के साथ आपसी सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रहना अपराध नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सामाजिक नैतिकता को कानून पर हावी नहीं होने दिया जा सकता। अगर किसी कृत्य को कानून अपराध नहीं मानता, तो केवल समाज की राय के आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती।

धमकियों के बीच कोर्ट का हस्तक्षेप

मामला उस वक्त गंभीर हुआ जब कपल ने याचिका दाखिल कर सुरक्षा की मांग की। महिला ने पहले ही पुलिस को आवेदन देकर बताया था कि वह बालिग है और अपनी मर्जी से इस रिश्ते में है। इसके बावजूद परिवार की तरफ से लगातार धमकियां मिल रही थीं और ऑनर किलिंग का डर बना हुआ था। कोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस को कपल की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया।

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पुलिस की जिम्मेदारी तय

अदालत ने कहा कि दो वयस्क अगर साथ रह रहे हैं, तो उनकी सुरक्षा करना पुलिस का कर्तव्य है। इस मामले में शाहजहांपुर पुलिस की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए गए। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के शक्ति वाहिनी बनाम भारत संघ केस का हवाला देते हुए साफ किया कि ऐसे मामलों में पुलिस को सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

गिरफ्तारी पर रोक और परिवार पर प्रतिबंध

कोर्ट ने कपल के खिलाफ दर्ज अपहरण के मामले में गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी। साथ ही महिला के परिवार को कपल से किसी भी तरह का संपर्क करने या नुकसान पहुंचाने से भी मना कर दिया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक दोनों को पूरी सुरक्षा दी जाएगी।

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बेंच और वकीलों की भूमिका

इस अहम मामले की सुनवाई जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की डिवीजन बेंच ने की। याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट शहंशाह अख्तर खान ने पक्ष रखा, जबकि राज्य और अन्य पक्षों की ओर से भी दलीलें पेश की गईं।

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  • Allahabad

Published : 
  • 27 March 2026, 10:18 PM IST