
चित्रकूट में मंदाकिनी का तांडव (IMG: AI Generated)
Chitrakoot: चित्रकूट में शनिवार को मां मंदाकिनी का जलस्तर अचानक बढ़ा तो नदी किनारे बसे इलाकों में हलचल तेज हो गई। देखते ही देखते शांत रहने वाली मंदाकिनी ने रौद्र रूप धारण कर लिया। नदी का पानी बढ़ता देख जहां प्रशासन और स्थानीय लोग हालात पर नजर बनाए रहे, वहीं दूसरी ओर चित्रकूट की पुरानी धार्मिक परंपरा भी सामने आई। मान्यता के मुताबिक, जब मां मंदाकिनी रुष्ट होती हैं तो उन्हें मनाने के लिए चित्रकूट का राज परिवार नदी तट पर पहुंचकर पूजा-अर्चना करता है। इसी परंपरा के तहत राज परिवार के मुखिया हेमराज सिंह चतुर्वेदी अपने बेटे और चित्रकूट विधानसभा के पूर्व विधायक नीलांशु चतुर्वेदी के साथ मंदाकिनी के तट पर पहुंचे।
राज परिवार ने नदी किनारे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। आरती की गई और मां मंदाकिनी से अपना रौद्र रूप शांत करने की प्रार्थना की गई। इसके बाद मां मंदाकिनी को चुनरी अर्पित की गई। इस दौरान नदी किनारे मौजूद लोगों के लिए यह पूरा दृश्य आस्था और परंपरा से जुड़ा भावुक पल बन गया।
शनिवार को लगातार बारिश और आसपास के इलाकों में पानी बढ़ने के बाद मंदाकिनी नदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ा। नदी के बढ़ते बहाव ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी। चित्रकूट में मंदाकिनी को केवल एक नदी के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि यहां इसे मां का दर्जा दिया गया है। इसी धार्मिक आस्था के बीच जब नदी का जलस्तर बढ़ा और मंदाकिनी का स्वरूप बदला तो चित्रकूट राज परिवार के मुखिया हेमराज सिंह चतुर्वेदी नदी तट पर पहुंचे। उनके साथ उनके पुत्र नीलांशु चतुर्वेदी भी मौजूद रहे।
पूजा के दौरान मां मंदाकिनी को चुनरी अर्पित की गई। स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार, मंदाकिनी को मां का स्वरूप माना जाता है और जब नदी का जलस्तर असामान्य रूप से बढ़ता है तो राज परिवार की ओर से पूजा कर मां को शांत करने की परंपरा रही है। नदी के किनारे पूजा करते राज परिवार को देखने के लिए स्थानीय लोग भी जुटे। श्रद्धालुओं के बीच यह विश्वास दिखाई दिया कि मां मंदाकिनी से प्रार्थना करने पर उनका रौद्र रूप शांत हो सकता है।
राज परिवार की ओर से पूजा-अर्चना और चुनरी अर्पित करने के बाद मंदाकिनी नदी का जलस्तर कम होना शुरू हो गया। इसके बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई। कई लोग इसे मां मंदाकिनी की कृपा और आशीर्वाद से जोड़कर देखने लगे। हालांकि नदी का जलस्तर कम होना बारिश, जलप्रवाह और आसपास के जलस्रोतों की स्थिति जैसी प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। ऐसे में जलस्तर में आई कमी को वैज्ञानिक तौर पर प्राकृतिक बदलाव के रूप में ही देखा जाएगा।
चित्रकूट आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदाकिनी नदी का विशेष धार्मिक महत्व है। रामघाट से लेकर नदी के दूसरे तटों तक धार्मिक गतिविधियां मंदाकिनी से जुड़ी हुई हैं। यहां नदी को सिर्फ पानी की धारा नहीं माना जाता, बल्कि मां के रूप में पूजा जाता है। यही वजह है कि जब मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ता है या नदी का स्वरूप बदलता है तो स्थानीय लोगों की भावनाएं भी उससे सीधे जुड़ जाती हैं। राज परिवार की ओर से की गई पूजा इसी परंपरा की एक झलक मानी जा रही है।
राज परिवार के नदी किनारे पहुंचने और पूजा करने की घटना ने चित्रकूट की पुरानी मान्यता को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। स्थानीय लोगों के बीच यह विश्वास है कि चित्रकूट और मंदाकिनी का रिश्ता केवल धार्मिक नहीं, बल्कि भावनात्मक भी है। नदी को मां मानने वाले श्रद्धालुओं के लिए पूजा, आरती और चुनरी अर्पित करना मां के प्रति सम्मान और समर्पण का प्रतीक है। शनिवार को भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। मंदाकिनी के बढ़े जलस्तर के बीच राज परिवार नदी किनारे पहुंचा, पूजा की और मां से रौद्र रूप शांत करने की प्रार्थना की।
Location : Chitrakoot
Published : 30 August 2026, 5:01 PM IST