मुजफ्फरनगर में 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान (फेज-2) की शुरुआत हुई, जिसमें जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने मिलकर टीबी उन्मूलन का संकल्प लिया। 25 मरीजों को गोद लेकर पोषण पोटली वितरित की गई और 38 टीबी मुक्त पंचायतों को सम्मानित किया गया।

मुजफ्फरनगर में टीबी मुक्त भारत अभियान
Muzaffarnagar: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में टीबी उन्मूलन की दिशा में एक सकारात्मक और प्रेरणादायक पहल देखने को मिली। जहां प्रशासन और समाज ने मिलकर एक स्वस्थ भविष्य की ओर कदम बढ़ाया। मंगलवार को जिला पंचायत सभागार में 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान (फेज-2) की शुरुआत हुई। जिसमें जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और समाज के लोगों ने मिलकर इस अभियान को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. वीरपाल निर्वाल मौजूद रहे, जबकि अध्यक्षता उमेश मिश्रा ने की। दोनों ने इस अभियान को जनभागीदारी से सफल बनाने पर जोर दिया और कहा कि टीबी जैसी बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए सामूहिक प्रयास बेहद जरूरी हैं।
कार्यक्रम के दौरान 25 टीबी मरीजों को गोद लिया गया और उन्हें पोषण पोटली वितरित की गई। यह पहल सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं, बल्कि मरीजों को मानसिक और सामाजिक सहयोग देने की दिशा में भी एक अहम कदम है। अधिकारियों ने कहा कि जब समाज साथ आता है। किसी भी बीमारी से लड़ना आसान हो जाता है।
इस अवसर पर वर्ष 2025 में टीबी मुक्त घोषित 38 ग्राम पंचायतों को भी सम्मानित किया गया। इनमें 25 ब्रॉन्ज, 10 सिल्वर और 3 गोल्ड कैटेगरी की पंचायतें शामिल रहीं। इन पंचायतों के ग्राम प्रधानों और सचिवों को सम्मानित कर उनके प्रयासों की सराहना की गई, जिससे अन्य गांव भी प्रेरणा ले सकें।
जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने सभी ग्राम प्रधानों से अपील की कि वे कम से कम एक टीबी मरीज को गोद लें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें। उनका कहना था कि छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़े बदलाव ला सकते हैं।
सीएमओ डॉ. सुनील तेवतिया ने बताया कि सरकार की ओर से टीबी मरीजों को इलाज के दौरान 6 हजार रुपये की पोषण सहायता दी जाती है। वहीं जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. लोकेश चंद्र गुप्ता ने 24 मार्च, विश्व क्षय रोग दिवस के मौके पर इस 100 दिवसीय अभियान की शुरुआत की जानकारी दी। उन्होंने समाज के लोगों, एनजीओ और संस्थाओं से निक्षय मित्र बनकर सहयोग करने की अपील की।
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कार्यक्रम के दौरान साई दान फाउंडेशन, डॉ. मुकेश जैन और डॉ. एमएल गर्ग को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। बड़ी संख्या में मौजूद ग्राम प्रधानों, सचिवों और सामाजिक संस्थाओं ने टीबी मुक्त समाज बनाने का संकल्प लिया। यह इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर रहा है।