हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: एक साथ नहीं लग सकतीं 420 और 406 की धाराएं, रद्द हुई कार्रवाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 406 एक ही मामले में एक साथ नहीं लगाई जा सकतीं। कोर्ट ने मेरठ के एक केस में जारी समन और कार्रवाई को रद्द कर दिया है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 19 June 2026, 2:26 PM IST

Prayagraj: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपराधिक मामलों में लगाई जाने वाली धाराओं को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 यानी धोखाधड़ी और धारा 406 यानी आपराधिक विश्वासघात को एक ही मामले में एक साथ नहीं लगाया जा सकता। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि अगर किसी केस में दोनों धाराएं एक साथ लगाई गई हैं तो ऐसा मुकदमा कानून की कसौटी पर टिक नहीं सकता।
यह फैसला न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकलपीठ ने सुनाया है। कोर्ट ने मेरठ जिले के सिविल लाइंस थाने में दर्ज एक मामले में आरोपी के खिलाफ जारी संज्ञान आदेश और समन को रद्द कर दिया।

मेरठ में दर्ज हुआ था मुकदमा

मामला मेरठ के सिविल लाइंस थाने से जुड़ा हुआ है। यहां अभिषेक गौतम के खिलाफ धारा 420, 406, 504 और 506 आईपीसी के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके बाद अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने आरोपी के खिलाफ संज्ञान लेते हुए समन जारी किया था। अभिषेक गौतम ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इस पूरी कार्रवाई को रद्द करने की मांग की थी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट में 5 साल बाद आई बड़ी भर्ती, युवाओं के लिए सुनहरा मौका, जानिए पूरी डिटेल

याचिकाकर्ता ने लगाए गलत तथ्यों के आरोप

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम और अधिवक्ता अतिप्रिया गौतम ने कोर्ट में दलील दी कि एफआईआर में लगाए गए आरोप वास्तविक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि शिकायत में मनगढ़ंत और गलत बातें लिखी गई हैं, जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। वहीं राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने याचिका का विरोध किया और मामले को सही बताया।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले का जिक्र किया। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली रेस क्लब मामले में दिए गए फैसले को आधार बनाया, जिसमें धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के बीच अंतर स्पष्ट किया गया था।

धोखाधड़ी और विश्वासघात में क्या अंतर?

हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 420 के तहत धोखाधड़ी साबित करने के लिए जरूरी है कि आरोपी की नीयत शुरुआत से ही गलत हो। यानी किसी व्यक्ति को झूठ बोलकर या गुमराह करके संपत्ति देने के लिए मजबूर किया गया हो। वहीं धारा 406 यानी आपराधिक विश्वासघात के मामले में स्थिति अलग होती है।

अमरोहा मर्डर केस में बड़ा यू-टर्न, उम्रकैद की सजा काट रही महिला को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली जमानत

दोनों अपराधों की प्रकृति अलग

कोर्ट ने कहा कि धोखाधड़ी में आरोपी शुरुआत से ही गलत इरादे से काम करता है, जबकि विश्वासघात में संपत्ति पहले भरोसे के आधार पर दी जाती है। इस वजह से दोनों अपराधों की परिस्थितियां अलग-अलग हैं और इन्हें एक साथ लागू नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने रद्द की कार्रवाई

हाईकोर्ट ने इस आधार पर अभिषेक गौतम के खिलाफ जारी संज्ञान आदेश और समन को रद्द कर दिया। कोर्ट के इस फैसले को आपराधिक मामलों में धाराओं के इस्तेमाल को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी माना जा रहा है। इस फैसले के बाद ऐसे मामलों में जहां 420 और 406 दोनों धाराएं एक साथ लगाई गई हैं, वहां अदालतें इस बात पर ध्यान देंगी कि आरोपों की प्रकृति वास्तव में किस अपराध से जुड़ी है।

Location :  Prayagraj

Published :  19 June 2026, 2:26 PM IST