मैनपुरी के भोगांव तहसील में यशोदा देवी ने लेखपाल पर अवैध वसूली और झूठे मुकदमे का आरोप लगाया। परिवार की दशकों पुरानी जमीन पर निर्माण रोकने और धमकी देने के मामले में उन्होंने जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच की मांग की है।

जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच की मांग
Mainpuri: जनपद मैनपुरी के भोगांव तहसील क्षेत्र के ग्राम अहिरवा से एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां की रहने वाली यशोदा देवी पत्नी रामसागर सिंह ने लेखपाल पर अवैध वसूली और झूठे मुकदमे में फंसाने का आरोप लगाया है। पीड़िता ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
पीड़िता के परिवार ने पिछले लगभग 70 वर्षों से तालाब गाटा संख्या 971/4.713 से सटी भूमि पर काबिज होकर मकान निर्माण किया हुआ है। यशोदा देवी का कहना है कि यह जमीन उनके परिवार की है और इसे तालाब की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। उनके अनुसार यह भूमि परिवार के अधिकार में दशकों से है और उन्होंने सभी निर्माण कार्य नियमों के अनुसार किए हैं।
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आरोप है कि 14 जनवरी 2026 को संबंधित लेखपाल मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य को तालाब की भूमि बताकर रोक दिया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि लेखपाल ने 12 हजार रुपये की अवैध मांग की। यशोदा देवी ने रुपये देने से इनकार किया, जिससे लेखपाल नाराज हो गया।
15 जनवरी 2026 को निर्माण कार्य के दौरान लेखपाल पुनः मौके पर पहुंचे और कथित रूप से गाली-गलौज तथा धमकी दी। इस दौरान ग्रामीणों ने बीच-बचाव किया और मामला थोड़ी देर के लिए शांत हुआ।
पीड़िता का कहना है कि इसके बाद लेखपाल ने तालाब की भूमि पर अवैध कब्जा दर्शाते हुए थाने में उनके भतीजों समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी। यशोदा देवी ने आरोप लगाया कि यह मुकदमा उन्हें और उनके परिवार को परेशान करने के लिए झूठा रूप से दर्ज कराया गया है।
यशोदा देवी ने जिलाधिकारी से मांग की है कि पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने दोषी लेखपाल के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता जताई और यह भी कहा कि झूठे मुकदमे में फंसाए गए निर्दोष लोगों को न्याय दिलाया जाए।
अब यह देखने की बात होगी कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है। स्थानीय लोग भी पीड़िता के समर्थन में खड़े हैं और मांग कर रहे हैं कि प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे। ग्राम अहिरवा और आसपास के लोग इस मामले को गंभीरता से देख रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों में लेखपाल और अन्य सरकारी कर्मी अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर रहे हैं, तो इसकी कड़ी कार्रवाई होना आवश्यक है।