Maharajganj: आठ महीने तक खुले आसमान के नीचे रही गर्भवती महिला, नवजात की मौत से उठे सवाल

महराजगंज के महदेवा चौराहे पर आठ महीने से रह रही निराश्रित गर्भवती महिला के नवजात की मौत हो गई। मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की गई है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 2 November 2026, 11:28 AM IST

Maharajganj: उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में एक निराश्रित गर्भवती महिला के नवजात शिशु की मौत का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि महिला करीब आठ महीने से श्यामदेउरवा थाना क्षेत्र के महदेवा चौराहे पर खुले आसमान के नीचे रह रही थी। रविवार सुबह चौराहे पर नवजात का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, जबकि महिला को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

इस घटना के बाद प्रशासनिक व्यवस्था और निराश्रित महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता बिनय कुमार पाण्डेय ने मामले की शिकायत राष्ट्रीय महिला आयोग, नई दिल्ली में दर्ज कराई है। उन्होंने पीड़िता को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

आठ महीने तक खुले आसमान के नीचे रही महिला

मिली जानकारी के अनुसार, महिला पिछले करीब आठ महीने से महदेवा चौराहे पर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर थी। इसी दौरान उसने एक बच्चे को जन्म दिया, लेकिन रविवार सुबह नवजात का शव मिलने की सूचना से इलाके में हड़कंप मच गया।

सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वहीं, महिला की हालत को देखते हुए उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिलहाल नवजात की मौत के कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।

दिल्ली में BS-4 वाहनों की एंट्री पर रोक से DND और चिल्ला बॉर्डर पर भीषण जाम, लाखों का जुर्माना

राष्ट्रीय महिला आयोग से की गई शिकायत

मामले को लेकर अधिवक्ता बिनय कुमार पाण्डेय ने राष्ट्रीय महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक गर्भवती महिला लंबे समय तक सार्वजनिक स्थान पर रहने को मजबूर रही, लेकिन उसे समय पर सुरक्षित आश्रय और जरूरी सुविधाएं नहीं मिल सकीं।

शिकायत के माध्यम से उन्होंने मांग की है कि पीड़िता को तत्काल वन स्टॉप सेंटर में सुरक्षित आश्रय दिया जाए। साथ ही उसे मुफ्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए और पांच लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा दिया जाए।

बेघर महिलाओं के पुनर्वास की भी मांग

अधिवक्ता ने केवल इस मामले में सहायता देने तक सीमित न रहते हुए पूरे जिले में सार्वजनिक स्थानों पर रहने वाली बेघर महिलाओं का सर्वे कराने की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसी महिलाओं की पहचान कर उनके सुरक्षित पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए।

इसके अलावा उन्होंने मामले में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग भी उठाई है।

Ind vs Nz ODI: वनडे सीरीज से पहले न्यूजीलैंड को बड़ा झटका, दो स्टार खिलाड़ी नहीं खेलेंगे मुकाबला

जरूरत पड़ी तो हाईकोर्ट में दाखिल होगी जनहित याचिका

बिनय कुमार पाण्डेय ने कहा कि वह पीड़ित महिला को निशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराएंगे। जरूरत पड़ने पर इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका भी दाखिल की जाएगी।

इस घटना ने प्रशासन के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर एक गर्भवती महिला करीब आठ महीने तक खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर क्यों रही? क्या संबंधित विभागों को इसकी जानकारी नहीं थी? अब राष्ट्रीय महिला आयोग में शिकायत के बाद प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सबकी नजर रहेगी।

Location :  Maharajganj

Published :  2 November 2026, 11:28 AM IST