Maharajganj: करोड़ों का बजट, फिर भी तबाही की ‘गारंटी’! महाव तटबंध पर 10 साल में खर्च हुए 50 करोड़, फिर भी डूबे हैं गांव

महराजगंज के महाव तटबंध पर पिछले 10 वर्षों में 50 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने के दावों के बावजूद हर साल बाढ़ और कटान की समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों ने स्थायी समाधान की मांग उठाई है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 10 July 2026, 2:29 PM IST

Maharajganj: भारत-नेपाल सीमा से सटे नौतनवा तहसील क्षेत्र के करीब एक दर्जन गांवों के लिए अभिशाप बन चुका महाव नाला अब प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है। वर्षों से बाढ़ और कटान की समस्या झेल रहे ग्रामीणों को राहत देने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। हर साल बरसात आते ही महाव का रौद्र रूप किसानों और ग्रामीणों के सामने नई मुसीबत खड़ी कर देता है।

महाव तटबंध की मजबूती और नाले की सिल्ट सफाई के नाम पर सिंचाई विभाग, वन विभाग और ग्राम पंचायतों द्वारा लगातार कार्य कराए जाते रहे हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014 से 2025 तक सिल्ट सफाई और तटबंध मरम्मत पर करीब 50 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। बावजूद इसके महाव तटबंध पिछले दस वर्षों में करीब 60 बार टूट चुका है।

हर साल बाढ़ से प्रभावित होते हैं दर्जनों गांव

नेपाल सीमा के पिलर नंबर 16 के पास झिंगटी गांव से भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करने वाला महाव नाला बरसात में विकराल रूप धारण कर लेता है। जलस्तर बढ़ते ही रेत से बने तटबंध कमजोर पड़ने लगते हैं और कटान का सिलसिला शुरू हो जाता है। पिछले वर्ष भी पहली ही बाढ़ में हरखपुरा और झिंगटी गांव के पास तटबंध कई स्थानों पर टूट गया था, जिससे किसानों की फसल और ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई थीं।

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हर साल दोहराई जाती है परेशानी

ग्रामीणों का कहना है कि महाव समस्या अब उनके जीवन का हिस्सा बन चुकी है। पीढ़ियों से किसान बाढ़ की मार झेल रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं हो सका। आरोप है कि हर साल मरम्मत के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन गुणवत्तापूर्ण कार्य नहीं होने के कारण समस्या जस की तस बनी रहती है।

 दस वर्षों में बार-बार टूटा महाव तटबंध

महाव तटबंध टूटने का सिलसिला पुराना है। वर्ष 2025 तक बरगदवा, हरखपुरा, झिंगटी, कोहरगड्डी और दोगहरा सहित कई गांवों में 14 से अधिक स्थानों पर तटबंध टूट चुका है।

वर्ष 2021 में खैरहवा दुबे, अमहवा और विशुनपुरा गांवों के सामने चार स्थानों पर तटबंध टूटा। वर्ष 2020 में दोगहरा, देवघट्टी, अमहवा और खैरहवा दुबे गांवों में कटान हुई। वर्ष 2017 में छितवनिया, खैरहवा दुबे, कनरी-चकरार, कोहरगड्डी और झिंगटी क्षेत्र में कई बार तटबंध क्षतिग्रस्त हुआ।

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वर्ष 2016 में दोगहरा, देवघट्टी, कनरी-चकरार और कोहरगड्डी गांवों के पास कटान हुई। वर्ष 2015 में दोगहरा, विशुनपुरा, खैरहवा दुबे, नरायनपुर और कोहरगड्डी क्षेत्र प्रभावित हुए। वर्ष 2014 में बरगदवा और खैरहवा दुबे सहित कई गांवों में तटबंध टूटने की घटनाएं सामने आईं।

 स्थायी समाधान की मांग

महाव की समस्या को लेकर ग्रामीण अब सिर्फ मरम्मत नहीं बल्कि स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि हर साल बजट खर्च करने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से तटबंध को मजबूत करने और नाले की स्थायी व्यवस्था करने की जरूरत है, ताकि किसानों और ग्रामीणों को हर बरसात में तबाही का सामना न करना पड़े।

Location :  Maharajganj

Published :  10 July 2026, 2:29 PM IST