महाराजगंज डीएम की अच्छी पहल: गौशालाओं की बदलेगी तस्वीर, चारा से लेकर गो-उत्पाद तक पर फोकस

महाराजगंज में गोवंश संरक्षण और गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में चारा, चिकित्सा, ठंड से बचाव और गो-उत्पादों के निर्माण को लेकर अहम निर्देश दिए गए।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 8 January 2026, 1:33 AM IST

Maharajganj: सड़कों पर भटकते गोवंश, अव्यवस्थित गौशालाएं और संसाधनों की कमी लंबे समय से प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई थी। लेकिन अब महाराजगंज में गोवंश संरक्षण को लेकर प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा की अध्यक्षता में हुई जिलास्तरीय समीक्षा बैठक में साफ संदेश दिया गया कि गौशालाओं में लापरवाही नहीं चलेगी और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना प्राथमिक लक्ष्य होगा।

गौशालाओं की गहन समीक्षा

कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिलास्तरीय अनुश्रवण, मूल्यांकन एवं समीक्षा समिति की बैठक में जनपद की सभी गौशालाओं की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में संरक्षित गोवंशों की संख्या, चारा व्यवस्था, चिकित्सा सुविधाएं, ठंड से बचाव और प्रबंधन की वास्तविक स्थिति पर चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने अधिकारियों से दो टूक कहा कि कागजी रिपोर्ट नहीं, जमीनी सुधार दिखना चाहिए।

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मॉडल गौशाला बनेगा गोसदन मधवलिया

जिलाधिकारी ने गोसदन मधवलिया की विशेष समीक्षा करते हुए इसे मॉडल गौशाला के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गौशालाओं को केवल संरक्षण केंद्र न मानकर आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाया जाए। इसके लिए स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी सुनिश्चित करने और साइलेज उत्पादन बढ़ाने की ठोस कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया, ताकि पूरे जनपद की हरे चारे की जरूरत पूरी हो सके।

आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर

डीएम ने गौकाष्ठ उत्पादन को व्यवस्थित रूप से बढ़ाने और गोमूत्र, गोबर आधारित दीये, जैविक खाद जैसे गो-उत्पादों के निर्माण और बिक्री की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। इसके लिए स्वयं सहायता समूहों के साथ समन्वय कर उपयुक्त गौशालाओं का चयन किया जाएगा। साथ ही जिन गौशालाओं में क्षमता से कम गोवंश हैं, वहां से गोवंशों को नजदीकी गौशालाओं में स्थानांतरित करने को कहा गया।

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व्यवस्थाओं में सख्ती

सभी गौशालाओं में बीमार गोवंशों के लिए अलग कक्ष की व्यवस्था अनिवार्य करने, गोचर भूमि के सत्यापन और चारा भूमि की फेंसिंग शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए। बायो फेंसिंग को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया गया। नोडल अधिकारियों को नियमित निरीक्षण और समय से रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए।

2776 गोवंश संरक्षित

मुख्य पशुचिकित्साधिकारी ने बताया कि जनपद की 31 गौशालाओं में कुल 2776 गोवंश संरक्षित हैं। बैठक में मुख्यमंत्री सुपुर्दगी योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया गया, ताकि अधिक से अधिक गोवंशों की सुपुर्दगी सुनिश्चित की जा सके।

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  • Maharajganj

Published : 
  • 8 January 2026, 1:33 AM IST