GST व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने को महराजगंज में भट्ठा कारोबारियों के साथ हुई अहम बैठक

महराजगंज में राज्य कर विभाग ने ईंट भट्ठा कारोबारियों के साथ व्यापारी संवाद कार्यक्रम किया। अधिकारियों ने जीएसटी नियमों और समाधान योजना की जानकारी दी, जबकि व्यापारियों ने मनरेगा भुगतान, बारिश से नुकसान, कोयला मानक, ई-वे बिल और टैक्स राहत जैसी कई अहम मांगें सरकार के सामने रखीं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 18 July 2026, 10:10 AM IST

Maharajganj: ईंट भट्ठा उद्योग को व्यवस्थित और जीएसटी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से राज्य कर विभाग ने जिले में व्यापारी संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। आयुक्त राज्य कर उत्तर प्रदेश (विधि अनुभाग), लखनऊ के निर्देश पर मऊपाकड़ स्थित ईंट निर्माता समिति कार्यालय में आयोजित इस बैठक में विभागीय अधिकारियों और ईंट भट्ठा संचालकों के बीच खुलकर चर्चा हुई। अधिकारियों ने कर नियमों और विशेष समाधान योजना की जानकारी दी, वहीं व्यापारियों ने उद्योग से जुड़ी जमीनी समस्याओं को विस्तार से रखा।

जीएसटी के दो विकल्पों की दी गई जानकारी

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि ईंट उद्योग के लिए जीएसटी की दो व्यवस्थाएं लागू हैं। पहला विकल्प 6 प्रतिशत जीएसटी बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के है, जबकि दूसरा विकल्प 12 प्रतिशत जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के साथ उपलब्ध है। कारोबारियों से समय पर जीएसटी रिटर्न दाखिल करने और वास्तविक बिक्री के अनुसार कर जमा करने की अपील की गई, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी या वित्तीय परेशानी न हो।

कम टैक्स जमा करने वालों पर विभाग की नजर

राज्य कर विभाग ने ऐसे भट्ठा संचालकों पर विशेष ध्यान देने की बात कही, जो सालाना दो लाख रुपये से कम कर जमा कर रहे हैं। अधिकारियों ने उन्हें कर अनुपालन बढ़ाने, नए व्यापारियों का पंजीकरण कराने तथा मुख्यमंत्री दुर्घटना बीमा योजना समेत अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।

भट्ठा संचालकों ने गिनाईं कारोबार की मुश्किलें

व्यापारियों ने बैठक में बताया कि मनरेगा के तहत सप्लाई की गई ईंटों का भुगतान समय पर नहीं मिलने से कारोबार प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा लगातार असमय बारिश के कारण उत्पादन घटा है और बाजार में ईंटों की मांग भी कमजोर बनी हुई है। उन्होंने सरकार से सड़क निर्माण और अन्य सरकारी परियोजनाओं में ईंटों के अधिक उपयोग की मांग की, ताकि स्थानीय उद्योग को बढ़ावा मिल सके।

कोयला मानक और ई-वे बिल पर भी उठे सवाल

बैठक में कारोबारियों ने वर्तमान कोयला मानक पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि एक लाख ईंटों के उत्पादन के लिए 18 टन कोयले का मानक व्यवहारिक नहीं है, क्योंकि मौजूदा गुणवत्ता वाले कोयले से उत्पादन के लिए लगभग 20 टन कोयले की आवश्यकता पड़ती है। साथ ही, ई-वे बिल जारी करने से पहले ओटीपी सत्यापन की व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाई गई, जिससे फर्जीवाड़े और तकनीकी समस्याओं पर रोक लग सके।

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अधिकारियों ने दिया समस्याओं के समाधान का भरोसा

राज्य कर विभाग के अधिकारियों ने व्यापारियों की सभी मांगों और सुझावों को गंभीरता से सुना। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शासन स्तर से जुड़े मुद्दों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा और विभागीय स्तर पर आने वाली समस्याओं का यथासंभव समाधान कराया जाएगा।

कार्यक्रम में उपायुक्त राज्य कर खंड-1 हरिशंकर प्रसाद, उपायुक्त राज्य कर खंड-2 एवं 3, सहायक आयुक्त प्रियंका श्रीवास्तव, संतोष कुमार, गजेन्द्र पाल सिंह, ईंट निर्माता समिति के अध्यक्ष मोहम्मद जहीर खान, महामंत्री पियूष करमचंदानी, कोषाध्यक्ष राम कुमार जायसवाल सहित बड़ी संख्या में भट्ठा व्यवसायी मौजूद रहे।

Location :  Maharajganj

Published :  18 July 2026, 10:04 AM IST