दलालों के शिकंजे में महराजगंज का ARTO कार्यालय? ओवरलोड इंट्री के नाम पर हर महीने 35–40 लाख की कथित वसूली, ऑडियो से मचा हड़कंप

महराजगंज के परिवहन विभाग में ओवरलोड वाहनों की कथित अवैध इंट्री और वसूली का मामला एक बार फिर चर्चा में है। सोशल मीडिया पर वायरल एक कथित ऑडियो के बाद दलाल, वाहन मालिकों और अधिकारियों की कथित मिलीभगत के आरोपों ने महकमे में हलचल बढ़ा दी है। हालांकि वायरल ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है।

Post Published By: Jay Chauhan
Updated : 4 August 2026, 11:32 PM IST

Maharajganj: जनपद के परिवहन विभाग से जुड़ा एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद ARTO कार्यालय एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। वायरल ऑडियो के आधार पर लगाए जा रहे आरोपों में ओवरलोड वाहनों की कथित अवैध इंट्री, दलालों के माध्यम से वसूली और विभागीय मिलीभगत की बातें कही जा रही हैं। हालांकि इन आरोपों और वायरल ऑडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

सूत्रों के अनुसार, ओवरलोड वाहनों को बिना कार्रवाई के सड़क पर संचालित कराने के लिए एक संगठित नेटवर्क सक्रिय होने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि इस नेटवर्क का संचालन एक चर्चित कस्बे के कथित दलाल के माध्यम से किया जाता है, जिसकी परिवहन विभाग के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों तक पहुंच बताई जा रही है। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

वायरल कथित ऑडियो में एक व्यक्ति स्वयं को वाहन मालिक बताते हुए यह कहते हुए सुनाई देता है कि यदि ओवरलोड वाहन चलाना है तो तय रकम देनी पड़ती है। ऑडियो में एक व्यक्ति का नाम लेकर यह दावा भी किया गया है कि उसी के माध्यम से पैसा जमा करने पर वाहन बिना किसी परेशानी के चलते हैं। इस ऑडियो की सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसे प्रमाणित नहीं माना जा सकता।

इन वाहनों से होती है वसूली

सूत्रों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार, ओवरलोड ट्रकों से करीब ₹7 हजार, पिकअप वाहनों से ₹3200 तथा छोटे व्यावसायिक वाहनों से ₹500 से ₹800 तक की कथित वसूली किए जाने का दावा किया जा रहा है। आरोप यह भी है कि जिन वाहनों से कथित रूप से रकम ली जाती है, उनकी सूची तैयार कर संबंधित लोगों तक पहुंचाई जाती है, ताकि चेकिंग के दौरान उन वाहनों को छोड़ा जा सके। इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

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हर महीने होती है इतनी लाख की वसूली

सूत्रों का यह भी दावा है कि इस कथित नेटवर्क के जरिए हर महीने 35 से 40 लाख रुपये तक की अवैध वसूली होती है। यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाला मामला होगा, बल्कि सड़क सुरक्षा और परिवहन व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।

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विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान

गौरतलब है कि करीब एक वर्ष पूर्व परिवहन विभाग में तैनात एक PTO ओवरलोडिंग से जुड़े एक मामले में कार्रवाई के बाद जेल भी जा चुके हैं। ऐसे में ताजा वायरल ऑडियो और नए आरोपों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Location :  Maharajganj

Published :  4 August 2026, 11:27 PM IST