महराजगंज जिले के ब्रजमनगंज ब्लॉक की परसौना ग्राम पंचायत में विकास कार्यों में कथित भ्रष्टाचार के आरोप सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित टीम 6 अप्रैल को गांव पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण करेगी। मामले को लेकर गांव में चर्चा तेज है।

पंचायत भवन परसौना ( Source DN)
Maharajganj: जिले के ब्रजमनगंज विकास खंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत परसौना इन दिनों चर्चा में है। गांव में विकास कार्यों में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। ग्राम विकास अधिकारी अरुण कुमार ठाकुर के खिलाफ लगे आरोपों के बाद प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है और पूरे मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है।
बताया जा रहा है कि परसौना गांव के निवासी दिलीप कुमार मौर्य, जो ध्रुवनरायन के पुत्र हैं, ने ग्राम पंचायत में हुए विकास कार्यों को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि गांव में कराए गए कई विकास कार्यों में अनियमितताएं बरती गई हैं और सरकारी धन के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने मामले को संज्ञान में लिया और जांच का आदेश दे दिया।
जिलाधिकारी महराजगंज के निर्देश पर जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी कार्यालय से पत्र 16 मार्च जारी किया गया। इसी पत्र के आधार पर पूरे मामले की जांच के लिए एक टीम गठित की गई है। इस जांच टीम में जिला पंचायत महराजगंज के अवर अभियंता रफीउल्लाह को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
प्रशासन ने बताया कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे। उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का यह भी कहना है कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है, इसलिए किसी भी तरह की गड़बड़ी को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
जांच टीम 6 अप्रैल को ग्राम पंचायत परसौना पहुंचकर मौके पर स्थलीय निरीक्षण करेगी। इस दौरान ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम प्रधान और शिकायतकर्ता को भी मौके पर उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही उनसे सभी जरूरी अभिलेख और दस्तावेज भी लेकर आने को कहा गया है ताकि जांच के दौरान तथ्यों की सही तरीके से पड़ताल की जा सके।
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गांव में जैसे ही जांच की खबर सामने आई, वैसे ही लोगों के बीच चर्चा का माहौल बन गया। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषी अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। फिलहाल पूरे गांव की नजर अब 6 अप्रैल को होने वाली जांच और उसके बाद आने वाली रिपोर्ट पर टिकी हुई है।