प्रयागराज माघ मेला के शाही स्नान विवाद में ममता कुलकर्णी ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को अहंकारी बताया। उन्होंने कहा कि नियम सबके लिए समान हैं और संत पद पर बैठे व्यक्ति को राजनीति नहीं, साधना और संयम दिखाना चाहिए।

माघ मेला विवाद में ममता कुलकर्णी की एंट्री (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
Prayagraj: माघ मेला के दौरान मौनी अमावस्या के शाही स्नान को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब इस मामले में अभिनेत्री से साध्वी बनीं ममता कुलकर्णी भी खुलकर सामने आ गई हैं। उन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें अहंकारी बताया और कहा कि उनके व्यवहार से संत परंपरा की गरिमा को ठेस पहुंची है।
ममता कुलकर्णी ने कहा कि जब भी माघ मेला जैसी विशाल धार्मिक जमावट होती है, तब शासन द्वारा बनाए गए नियमों का पालन हर किसी को करना होता है। उन्होंने कहा कि माघ महीना अत्यंत पवित्र होता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु स्नान के लिए आते हैं। ऐसे में अनुशासन और व्यवस्था सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।
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ममता ने पिछले वर्ष की घटनाओं को याद करते हुए कहा कि रथ और पालकी निकालने के कारण कई लोगों की जान चली गई थी। उस समय भी सवाल उठे थे कि प्रशासन कहां है। उन्होंने कहा कि तब भी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ही प्रशासन पर सवाल उठा रहे थे, लेकिन इस बार उन्हें स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए था।
ममता कुलकर्णी ने कहा कि शंकराचार्य जैसे पद पर आसीन व्यक्ति को अहंकार नहीं दिखाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि अविमुक्तेश्वरानंद के व्यवहार में अहंकार साफ झलकता है। उनका कहना था कि आदि शंकराचार्य होते तो शायद कभी पालकी या विशेष सम्मान की मांग नहीं करते, बल्कि नियमों का पालन कर साधारण तरीके से अमृत स्नान करते।
ममता ने कहा कि इस पूरे विवाद में अविमुक्तेश्वरानंद ने न सिर्फ अपना सम्मान खोया, बल्कि संतता भी खो दी। उन्होंने कहा कि मान, अपमान, गौरव और पालकी- ये सब मोह हैं, जिनका त्याग करना ही संन्यास का मूल है। पुलिस प्रशासन द्वारा 15 मिनट का अनुरोध करने के बावजूद विवाद बढ़ाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
ममता कुलकर्णी ने स्पष्ट कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को माफी मांगने की जरूरत नहीं है, बल्कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को प्रायश्चित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी वजह से उनके शिष्यों और बटुकों का भी अपमान हुआ है, जो और अधिक गंभीर विषय है।
ममता ने कहा कि केवल चार वेद और पुराण पढ़ लेने से कोई शंकराचार्य नहीं बन जाता। इसके लिए आत्मज्ञान और आत्मबोध जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने स्वयं 25 वर्षों तक तप और साधना की है, तभी उन्हें महामंडलेश्वर की उपाधि मिली।
आनंद गिरि महाराज और अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा जगद्गुरु रामभद्राचार्य पर की गई कथित टिप्पणियों को ममता ने शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि आत्मज्ञान और शारीरिक विकलांगता का कोई संबंध नहीं होता और इस तरह की सोच घोर अज्ञान को दर्शाती है।
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ममता कुलकर्णी ने सवाल उठाया कि अविमुक्तेश्वरानंद प्रयागराज स्नान के लिए गए थे या राजनीति करने। उन्होंने कहा कि गौहत्या या अन्य राजनीतिक विषयों के लिए माघ मेला सही मंच नहीं है। अंत में उन्होंने कहा कि वह स्वयं भगवा वस्त्र त्यागने पर विचार कर रही हैं ताकि उन्हें किसी राजनीतिक दल का एजेंट न कहा जाए और सत्य सामने आ सके।