Lucknow-Noida Memorial Scam: 1400 करोड़ के महाघोटाले में नया अपडेट, ये 57 अफसर रडार पर

लखनऊ-नोएडा स्मारक निर्माण से जुड़े 1400 करोड़ रुपये के महाघोटाले में 10 साल बाद जांच तेज हो गई है। LDA के पूर्व बड़े इंजीनियरों पर कार्रवाई की तैयारी से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा है।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 2 January 2026, 6:40 PM IST

Lucknow/Noida: लखनऊ से लेकर नोएडा तक बने भव्य स्मारकों की चमक के पीछे छिपा 1400 करोड़ रुपये का महाघोटाला एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब एक दशक से ठंडे बस्ते में पड़ी इस फाइल में अब तेजी आ गई है। स्मारकों के निर्माण के नाम पर सरकारी खजाने को भारी चूना लगाए जाने के मामले में अब सीधे बड़े अफसरों पर शिकंजा कसने की तैयारी है।

2014 की FIR पर अब तेज हुई कार्रवाई

यह पूरा मामला वर्ष 2014 में दर्ज विजिलेंस एफआईआर से जुड़ा है। जांच के आधार पर अब लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता के खिलाफ सीधी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत ने इस केस की जांच को प्राथमिकता पर लेते हुए सभी संबंधित दस्तावेज तत्काल तलब किए हैं। उन्होंने LDA सचिव को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जांच से जुड़ा कोई भी रिकॉर्ड रोका न जाए।

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बसपा शासनकाल में हुआ था महाघोटाला

यह घोटाला वर्ष 2007 से 2011 के बीच बसपा सरकार के कार्यकाल में सामने आया था। लखनऊ और नोएडा में बने अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल, मान्यवर कांशीराम स्मारक स्थल, गौतम बुद्ध उपवन और नोएडा स्थित कांशीराम ईको ग्रीन गार्डन में पत्थरों की खरीद और निर्माण कार्यों में भारी अनियमितताएं पाई गई थीं। जांच में सामने आया कि निर्माण सामग्री की कीमतें कई गुना बढ़ाकर दिखाईं गईं और सरकारी धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हुआ। कुल घोटाले की राशि करीब 1400 करोड़ रुपये आंकी गई थी।

57 अफसर-कर्मचारी जांच के घेरे में

इस घोटाले में सिर्फ LDA ही नहीं, बल्कि राजकीय निर्माण निगम के अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल पाए गए थे। जांच में कुल 57 अधिकारी और कर्मचारी दोषी पाए जाने की आशंका के दायरे में आए। शासन ने 22 दिसंबर 2025 को आदेश जारी कर लखनऊ कमिश्नर को निर्देश दिया कि जांच जल्द पूरी कर कार्रवाई रिपोर्ट शासन को सौंपी जाए।

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इन अफसरों पर गिरेगी गाज

इस पूरे मामले में LDA सचिव विवेक श्रीवास्तव को नोडल अधिकारी बनाया गया है। प्राधिकरण की ओर से सभी फाइलें और तकनीकी दस्तावेज कमिश्नर को सौंपे जाएंगे। सबसे अहम बात यह है कि तत्कालीन अधीक्षण अभियंता विमल कुमार सोनकर और तत्कालीन मुख्य अभियंता त्रिलोकी नाथ, दोनों सेवानिवृत्त अधिकारी हैं, फिर भी इनके खिलाफ विभागीय व कानूनी कार्रवाई की तैयारी अंतिम चरण में है।

आगे और खुलासों की उम्मीद

सूत्रों के मुताबिक जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। वर्षों बाद तेज हुई इस कार्रवाई से प्रशासनिक गलियारों में हलचल मची हुई है और माना जा रहा है कि यह मामला उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े निर्माण घोटालों में एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है।

Location : 
  • Lucknow/Noida

Published : 
  • 2 January 2026, 6:40 PM IST