कानपुर में गंगा और पाण्डु नदी का तांडव: बैराज पर बढ़ा जलस्तर, दक्षिण इलाके में बाढ़ का खतरा मंडराया

कानपुर में गंगा और पाण्डु नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से हालात गंभीर हो गए हैं। बैराज पर पानी चेतावनी बिंदु के करीब पहुंच गया है, जबकि दक्षिण क्षेत्र और मकड़ीखेड़ा में रास्ते जलमग्न होने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 5 September 2026, 12:03 PM IST

Kanpur: उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर में इन दिनों कुदरत का कहर देखने को मिल रहा है। लगातार बढ़ रहे जलस्तर के कारण गंगा और पाण्डु नदियों के तेवर तल्ख हो गए हैं, जिससे प्रशासन और स्थानीय नागरिकों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। ऊपरी बैराजों से लगातार छोड़े जा रहे पानी के कारण शहर के कई निचले इलाकों और रिहायशी क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं।

कानपुर बैराज पर चेतावनी बिंदु के करीब पहुंचा पानी

कानपुर बैराज के अपस्ट्रीम में पानी का स्तर बढ़कर 113.800 मीटर पर पहुंच गया है, जो पिछली माप से छह सेंटीमीटर अधिक है। खास बात यह है कि बैराज का चेतावनी स्तर 114 मीटर तय किया गया है, जिसके चलते जलस्तर अब इस खतरे के निशान से महज 20 सेंटीमीटर नीचे बह रहा है। वहीं, बैराज पर खतरे का निशान 115 मीटर पर निर्धारित है।

बैराज के डाउनस्ट्रीम की स्थिति भी कुछ ऐसी ही बनी हुई है, जहां जलस्तर बढ़कर 113.550 मीटर दर्ज किया गया, जबकि पिछले अपडेट में यह आंकड़ा 113.490 मीटर था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बैराज से इस समय लगभग 3.16 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है, जिसमें पिछले डिस्चार्ज के मुकाबले 6,337 क्यूसेक की बढ़ोतरी हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, बैराज का खतरे के स्तर पर निर्धारित डिस्चार्ज करीब 5.44 लाख क्यूसेक है।

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शुक्लागंज में भी बढ़ी धड़कनें, ऊपरी इलाकों से लगातार आ रहा पानी

गंगा के इस विकराल रूप का असर पड़ोसी क्षेत्र शुक्लागंज में भी साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। यहां गंगा का जलस्तर 112.340 मीटर रिकॉर्ड किया गया है, जो पिछले स्तर से नौ सेंटीमीटर ज्यादा है। हालांकि यहां चेतावनी स्तर 113 मीटर और खतरे का स्तर 114 मीटर है, लेकिन पानी का लगातार बढ़ना आसपास की बस्तियों के लिए खतरे की घंटी साबित हो रहा है।

जलस्तर में इस बेतहाशा वृद्धि के पीछे ऊपरी बैराजों से छोड़ा गया पानी मुख्य वजह है। हरिद्वार बैराज से लगभग 1.13 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जो पिछले आंकड़ों से 13,075 क्यूसेक अधिक है। इसके अलावा, नरौरा बैराज से भी लगभग 87 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जिसमें 9,234 क्यूसेक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऊपरी क्षेत्रों से लगातार आ रहे इस पानी की वजह से कानपुर में गंगा के पूरे प्रवाह पर पैनी नजर रखी जा रही है।

पाण्डु नदी बनी दक्षिण कानपुर के लिए आफत

गंगा के अलावा दक्षिण कानपुर में पाण्डु नदी का बढ़ता जलस्तर स्थानीय लोगों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन गया है। नदी का पानी उफनकर आसपास के कई इलाकों और गांवों में घुस गया है, जिससे लोग बाढ़ जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। कई स्थानों पर हालात इतने खराब हैं कि पानी सीधे घरों के अंदर तक पहुंच गया है, जिससे लोगों की आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई है। भयंकर जलभराव के कारण क्षेत्रीय नागरिकों के रोजमर्रा के कामकाज और बच्चों की दिनचर्या पर भी भारी असर पड़ा है।

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मकड़ीखेड़ा समेत कई क्षेत्रों में जलमग्न हुए रास्ते

कल्याणपुर स्थित मकड़ीखेड़ा और उसके आसपास के तमाम इलाकों में इस समय गंभीर जलभराव की स्थिति बनी हुई है। मुख्य सड़कें और आने-जाने के रास्ते पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय परिवारों के सामने इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती घरों से सुरक्षित बाहर निकलने और रोजमर्रा का जरूरी सामान जुटाने की बनी हुई है। फिलहाल, जिला प्रशासन और संबंधित विभाग गंगा और पाण्डु नदी के जलस्तर पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

Location :  Kanpur

Published :  5 September 2026, 12:03 PM IST