महराजगंज में प्रभारी मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्रा ‘दयालु’ ने जी राम जी अधिनियम को मनरेगा से अधिक पारदर्शी और डिजिटल आधारित बताया। अधिनियम में 185 दिन रोजगार, साप्ताहिक भुगतान, GPS निगरानी और बिचौलियों को समाप्त करने की व्यवस्था शामिल है।

महराजगंज में डिजिटल स्ट्राइक
Maharajganj: भाजपा कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान प्रभारी मंत्री और उत्तर प्रदेश के आयुष मंत्री स्वतंत्र प्रभार डॉ. दयाशंकर मिश्रा ‘दयालु’ ने जी राम जी अधिनियम को भ्रष्टाचार पर सीधी चोट करने वाला डिजिटल सुधार बताया। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम से ग्रामीण विकास और रोजगार में नई रफ्तार आएगी।
डॉ. मिश्रा ने मनरेगा योजना से तुलना करते हुए कहा कि “जहां मनरेगा में पारदर्शिता और क्रियान्वयन को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं, वहीं जी राम जी अधिनियम तकनीक आधारित, पारदर्शी और जवाबदेही सुनिश्चित करने वाला मॉडल है।”
प्रभारी मंत्री ने कहा, “जी राम जी अधिनियम सरकार की डिजिटल स्ट्राइक है बटन दबा नहीं और गड़बड़ी आउट।” अधिनियम में पात्रता निर्धारण, भुगतान और निगरानी पूरी तरह तकनीक आधारित है। इससे बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त हो जाती है और लाभ सीधे पात्र लाभार्थियों तक पहुंचता है।
उन्होंने बताया कि रोजगार के दिनों में बड़ा सुधार किया गया है। पहले 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित था, अब प्रत्येक परिवार को 125 दिन का रोजगार मिलेगा। इसके अतिरिक्त खेती से जुड़े कार्यों के लिए 60 दिन का आरक्षित रोजगार तय किया गया है। कुल मिलाकर प्रत्येक परिवार को 185 दिन रोजगार की गारंटी दी गई है। यह विशेष रूप से फसल बोआई और कटाई के समय किसानों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि मजदूरी भुगतान अब हर सप्ताह सुनिश्चित किया गया है। यदि सात दिनों के भीतर भुगतान नहीं होता है, तो ब्याज सहित भुगतान की गारंटी दी जाएगी। इसके अलावा, यदि किसी ग्रामीण को काम की मांग के 15 दिनों के भीतर रोजगार नहीं मिलता है तो उसे बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। इसके साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों की समय-सीमा और देयता भी स्पष्ट कर दी गई है, जिससे जवाबदेही और प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित होगा।
डाइनामाइट न्यूज़ से खास बातचीत
डॉ. मिश्रा ने बताया कि अधिनियम में आधार आधारित सत्यापन, GPS निगरानी और सप्ताहिक सार्वजनिक डेटा प्रकाशन जैसी तकनीक शामिल की गई है। इसके अलावा वर्ष में दो बार सामाजिक ऑडिट और निरंतर निगरानी के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर स्टेयरिंग कमेटियों का गठन किया गया है।
उन्होंने कहा कि जी राम जी अधिनियम केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण विकास और जवाबदेही को जोड़ने वाला मॉडल है। “लाभार्थी लाइन में नहीं, सिस्टम में दिखे।”
इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष संजय पांडेय ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार की प्राथमिकता पारदर्शी शासन और योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि जी राम जी अधिनियम न दलाल वाला है, न देरी वाला, और जनता के भरोसे को मजबूत करने वाला है।
पत्रकार वार्ता में पनियरा विधायक ज्ञानेंद्र सिंह, फरेंदा के पूर्व विधायक चौधरी शिवेंद्र सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष, जिला महामंत्री एवं अभियान संयोजक राजेश उर्फ बबलू यादव, जिला मीडिया प्रभारी संजीव शुक्ला समेत अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
डॉ. मिश्रा ने जोर देकर कहा कि इस अधिनियम के माध्यम से रोजगार और विकास को जोड़ने का प्रयास किया गया है। तकनीक आधारित निगरानी और साप्ताहिक भुगतान प्रणाली ग्रामीणों के लिए भरोसे और सुविधा दोनों बढ़ाती है। GPS निगरानी और डिजिटल प्रक्रिया से भ्रष्टाचार लगभग समाप्त हो जाएगा और योजनाओं का लाभ सीधे पात्रों तक पहुंचेगा।
उन्होंने कहा कि इस मॉडल के लागू होने से न केवल रोजगार में वृद्धि होगी बल्कि ग्रामीणों की जीवन गुणवत्ता में सुधार होगा। सरकार का लक्ष्य ऐसी व्यवस्था बनाना है, जहां योजनाओं का लाभ सीधे और समय पर अंतिम लाभार्थी तक पहुंचे।