कानपुर के कॉल सेंटर में डेढ़ महीने की ट्रेनिंग, 12वीं पास फर्राटेदार अंग्रेजी बोलकर वसूलते थे पाउंड-डॉलर

कानपुर में फर्जी कॉल सेंटर के जरिए यूके के लोगों से ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा हुआ है। 12वीं पास युवक फर्राटेदार अंग्रेजी बोलकर खुद को सीआईडी से जुड़ा बताते और लोन सेटलमेंट व बीमा की किस्तों में राहत का झांसा देते थे। पुलिस ने मैनेजर समेत कई लोगों को पकड़ा है और अब पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 9 September 2026, 3:34 PM IST

कानपुर : महज 12वीं पास युवकों ने फर्राटेदार अंग्रेजी बोलकर यूके के लोगों को अपने जाल में फंसा लिया। कभी खुद को क्रेडिट इन्वेस्टिगेटिंग डिपार्टमेंट का अधिकारी बताते तो कभी लोन सेटलमेंट और बीमा पॉलिसी की किस्तों में छूट का झांसा देते। इसके बाद फीस और किस्तों के नाम पर पाउंड और डॉलर वसूलते थे। कानपुर में पकड़े गए फर्जी कॉल सेंटर की जांच में साइबर क्राइम ब्रांच को ठगी के इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पता चला है।

दो पन्नों की स्क्रिप्ट से सिखाई जाती थी ठगी

क्राइम ब्रांच और साइबर क्राइम ब्रांच ने सोमवार रात जाजमऊ के केडीए चौराहा स्थित जमजम अपार्टमेंट में चल रहे कॉल सेंटर पर छापा मारा। मौके से मैनेजर अब्दुल वाहिब समेत चार युवतियां और सात युवक मिले। पूछताछ में सामने आया कि कर्मचारियों को करीब डेढ़ महीने की ट्रेनिंग दी जाती थी। उन्हें बातचीत के लिए दो पन्नों की स्क्रिप्ट दी जाती थी, ताकि यूके के लोगों से बात करते समय कहीं कोई गलती न हो।

पुलिस के मुताबिक, कॉल सेंटर इंटरनिटी डिजी इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड के नेतृत्व में चल रहा था। इसका मुख्यालय लखनऊ के विभूति खंड में बताया गया है। कंपनी से जुड़े युवराज शुक्ला के बारे में भी पुलिस जानकारी जुटा रही है।

‘हैलो, हैव यू इन डेब्ट’ से शुरू होती थी बातचीत

कॉल सेंटर के कर्मचारी फोन पर सबसे पहले पूछते थे, ‘हैलो, हैव यू इन डेब्ट?’ यानी क्या आप कर्ज में हैं। सामने से हां मिलते ही खुद को सीआईडी से डेटा मिलने की बात कहते थे। इसके बाद लोन सेटलमेंट और आईवीए-एचडीआर जैसी सेवाओं के नाम पर कम किस्त में कर्ज चुकाने का भरोसा दिलाया जाता था।

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जाल में फंसने वाले व्यक्ति से पहले फीस मांगी जाती थी। मामला तैयार होने पर कॉल लखनऊ में बैठे युवराज शुक्ला को ट्रांसफर कर दी जाती थी। इसके बाद फीस और किस्तों के नाम पर रकम वसूली जाती थी।

एक कर्मचारी को रोज करने पड़ती थीं 300 कॉल

साइबर थाना प्रभारी अभय सिंह के मुताबिक, आरोपियों ने अपनी पहचान और कॉल की लोकेशन छिपाने के लिए क्लाउड कॉलिंग और वीसी डायलिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया। एक कर्मचारी को रोजाना करीब 250 से 300 कॉल करने का टारगेट दिया जाता था। कर्मचारियों की ऑनलाइन एक्सेल शीट में हाजिरी और काम का रिकॉर्ड रखा जाता था।

पुराने कॉल सेंटरों से जुड़े थे कर्मचारी

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि पकड़े गए कई कर्मचारी पहले बंद हो चुके कॉल सेंटरों में काम कर चुके हैं। मैनेजर अब्दुल वाहिब भी पहले निफ्टेल और सैफ जेडए कनेक्ट जैसे कॉल सेंटरों में काम कर चुका है। साइबर क्राइम ब्रांच ने अब्दुल वाहिब, युवराज शुक्ला और इंटरनिटी डिजी इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क ने अब तक यूके के कितने लोगों को ठगा और पाउंड-डॉलर के रूप में कितनी रकम वसूली।

Location :  Kanpur

Published :  9 September 2026, 3:34 PM IST