रायबरेली में बागवानी मिशन को नई रफ्तार, किसानों को मिले करोड़ों के प्रोजेक्ट

रायबरेली के बछरावां में आयोजित राज्य स्तरीय गोष्ठी में उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने बागवानी योजनाओं के तहत किसानों को अनुदान, बीज और मौन पालन से जुड़े संसाधन वितरित किए। शहद उत्कृष्टता केंद्र को किसानों की आय बढ़ाने वाला बताया गया।

Post Published By: Nitin Parashar
Updated : 16 January 2026, 5:21 AM IST

RaeBareli: खेती को परंपरागत ढर्रे से निकालकर आधुनिक और मुनाफे का जरिया बनाने की दिशा में रायबरेली में एक अहम कदम उठाया गया। नगर पंचायत बछरावां सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय गोष्ठी में न सिर्फ योजनाओं की जानकारी दी गई, बल्कि किसानों को सीधे लाभ भी पहुंचाया गया। राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार तथा कृषि निर्यात दिनेश प्रताप सिंह की मौजूदगी में एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत बीज वितरण और परियोजना स्वीकृति कार्यक्रम ने किसानों में नई उम्मीद जगा दी।

एकीकृत बागवानी मिशन पर फोकस
कार्यक्रम के दौरान उद्यान मंत्री ने एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत चयनित लाभार्थियों को स्वीकृत पत्र वितरित किए। अजय कुमार सिंह और नीरज कुमार को मशरूम उत्पादन इकाई की स्थापना के लिए क्रमशः 58.22 लाख और 63.13 लाख रुपये की परियोजना लागत के स्वीकृति पत्र दिए गए। वहीं श्यामा सिंह, महेन्द्र बहादुर सिंह और रितिक शेखर को पॉलीहाउस स्थापना के लिए 28.75-28.75 लाख रुपये की परियोजना स्वीकृत की गई। कुल मिलाकर 207.6 लाख रुपये की परियोजनाओं के स्वीकृति पत्र वितरित किए गए।

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मौन पालन और बीज वितरण
कार्यक्रम की एक खास बात यह रही कि राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान, लखनऊ द्वारा नगर पंचायत बछरावां में आयोजित चार दिवसीय मौन पालन प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले 40 कृषकों को प्रमाण पत्र दिए गए। साथ ही शहद उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक किसान को 5-5 मधुमक्खी छत्ते और बी-कॉलोनी वितरित की गई। उद्यान विभाग की योजनाओं के तहत किसानों को निःशुल्क सब्जियों के बीज भी बांटे गए।

शहद उत्कृष्टता केंद्र बनेगा गेम चेंजर
उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि करीब 972.15 लाख रुपये की लागत से रायबरेली में बन रहा शहद उत्कृष्टता केंद्र किसानों के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इससे न केवल शहद उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि किसान प्रशिक्षण लेकर मौन पालन के क्षेत्र में आगे बढ़ सकेंगे और उनकी आय में भी इजाफा होगा। उन्होंने कहा कि मधुमक्खी पालन से परपरागण बढ़ेगा, जो अन्य बागवानी फसलों के लिए भी फायदेमंद है।

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तकनीकी जानकारी और योजनाओं की जानकारी
एनबीआरआई के निदेशक डॉ. अजीत कुमार शासनी ने किसानों को मौन पालन की तकनीक और शहद उत्पादन को बढ़ाने के तरीकों पर जानकारी दी। जिला उद्यान अधिकारी डॉ. जय राम वर्मा ने बताया कि मौन पालन योजना में 3.20 लाख रुपये की परियोजना लागत पर 40 प्रतिशत यानी 1.28 लाख रुपये का अनुदान दिया जाता है।

भारी संख्या में किसान रहे मौजूद
कार्यक्रम में संयुक्त निदेशक उद्यान, उप निदेशक उद्यान डॉ. सौमित कुमार बोहरा, एनबीआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. दयाशंकर सहित कई वैज्ञानिक, उद्यान विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और करीब 350 किसान मौजूद रहे।

Location : 
  • Raebareli

Published : 
  • 16 January 2026, 5:21 AM IST