दिवाली की खरीदारी के लिए हाथरस में लगा सरस मेला, ग्रामीण महिलाओं के स्वदेशी उत्पादों की धूम

हाथरस में दिवाली के अवसर पर चार दिवसीय सरस मेला शुरू हुआ। स्वयं सहायता समूहों की ग्रामीण महिलाएं शहद, मसाले, पूजा सामग्री और हस्तनिर्मित उत्पाद बेचकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 5 November 2026, 3:23 PM IST

Hathras: दीवाली के शुभ अवसर पर ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से, 'राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन' के तहत चार दिवसीय जिला-स्तरीय 'सरस मेला' आयोजित किया जा रहा है। यह मेला मथुरा रोड पर, विकास भवन और कलेक्ट्रेट के बीच लगाया गया है। बुधवार को मुख्य विकास अधिकारी (CDO) पी.एन. दीक्षित ने फीता काटकर मेले का उद्घाटन किया। उद्घाटन के बाद, उन्होंने विभिन्न स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिलाओं द्वारा लगाए गए स्टॉलों का दौरा किया, उनके उत्पादों के बारे में जानकारी ली और कुछ खरीदारी भी की।

इस मौके पर CDO पी.एन. दीक्षित ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं अपने कौशल और कड़ी मेहनत से कई तरह के उपयोगी और आकर्षक उत्पाद बना रही हैं। 'सरस मेला' इन उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने और महिलाओं की आय बढ़ाने का एक बेहतरीन मंच है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे दीवाली की खरीदारी के लिए इस मेले में आएं और स्थानीय स्तर पर बने, स्वदेशी और हस्तनिर्मित उत्पादों को प्राथमिकता दें। इससे इन महिला उद्यमियों का मनोबल बढ़ेगा और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।

बारी-बारी से 5,000 समूहों को मिलेगा मौका

शुरुआत में, जिले के विभिन्न विकास खंडों से आए 10 स्वयं सहायता समूहों ने मेले में अपने स्टॉल लगाए हैं। चूंकि पूरे जिले में ऐसे लगभग 5,000 समूह सक्रिय हैं, इसलिए अलग-अलग समूहों को बारी-बारी से स्टॉल लगाने और अपने उत्पाद बेचने का मौका दिया जाएगा। इससे अधिक से अधिक ग्रामीण महिलाओं को अपने सामान का प्रचार करने और उसे बेचने के लिए एक मंच मिल सकेगा।

स्वदेशी उत्पादों की विविधता ने सबका ध्यान खींचा; मसालों की भारी मांग

इन महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पाद 'सरस मेला' में आने वाले खरीदारों के लिए मुख्य आकर्षण बन गए हैं। इन स्टॉलों पर कई तरह की चीजें मिल रही हैं, जिनमें शहद, हाथ से तैयार किए गए मसाले, देवी-देवताओं के वस्त्र, पूजा-पाठ का सामान, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, मोमबत्तियां, मोम से बनी सजावटी चीजें, हाथ से बने आभूषण, सौंदर्य प्रसाधन और घर के इस्तेमाल का अन्य सामान शामिल है। फिरोजाबाद की चूड़ियां—जिन पर सजावटी पत्थर जड़े हैं—और कांच के मोतियों की कई किस्में भी लोगों का खूब ध्यान खींच रही हैं। हाथ से तैयार मसालों की इतनी ज्यादा मांग थी कि एक समूह ने अपना ज्यादातर स्टॉक बहुत जल्दी बेच दिया। सुबह से ही स्टॉलों पर खरीदारों की अच्छी-खासी भीड़ देखी जा रही है।

प्रशासन महिला समूहों से खरीदारी को दे रहा प्राथमिकता

प्रशासन ग्रामीण महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों के लिए एक स्थायी बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में सक्रिय कदम उठा रहा है। विकास विभाग 'स्वयं सहायता समूहों' (SHGs) से दीये, झाड़ू और सफाई का अन्य सामान खरीदने को प्राथमिकता देगा। अधिकारियों ने भी मेले का दौरा किया और देवी-देवताओं के वस्त्र, फूलों की मालाएं तथा मोमबत्तियां खरीदकर अपना समर्थन जताया।

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मुख्य विकास अधिकारी (CDO) ने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना सिर्फ खरीदारी तक सीमित नहीं है; यह ग्रामीण महिलाओं की कड़ी मेहनत का सम्मान करने और उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने का एक प्रयास है। उन्होंने लोगों से मेले में आने और 'वोकल फॉर लोकल' (स्थानीय उत्पादों का समर्थन करने) की भावना को अपनाने की अपील की।

इस मौके पर जिला विकास अधिकारी प्रेमनाथ यादव के साथ-साथ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद थे।

Location :  Hathras

Published :  5 November 2026, 3:23 PM IST