हर्षा रिछारिया अब छोड़ देंगी धर्म प्रचार का रास्ता, जानें क्यों लिया साध्वी छोड़कर एंकरिंग करने का फैसला

प्रयागराज महाकुंभ से चर्चा में आईं हर्षा रिछारिया ने कहा है कि वह दान-दक्षिणा पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं। धर्म प्रचार के साथ एंकरिंग कर आत्मनिर्भर होकर सनातन के लिए काम करना चाहती हैं।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 27 January 2026, 2:03 AM IST
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Prayagraj: प्रयागराज महाकुंभ से चर्चा में आईं हर्षा रिछारिया एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह है उनका साफ और बेबाक नजरिया, जिसमें उन्होंने धर्म, साध्वी जीवन और आर्थिक आत्मनिर्भरता को लेकर खुलकर बात की है। हर्षा का कहना है कि वह दान-दक्षिणा पर निर्भर रहकर साध्वी नहीं बनना चाहतीं, बल्कि अपने दम पर सनातन धर्म के लिए काम करना चाहती हैं। इसी वजह से उन्होंने धर्म प्रचार के साथ-साथ एंकरिंग करने का फैसला लिया है, ताकि उन्हें आर्थिक सहारा मिल सके।

धर्म के नाम पर दिखावे पर सवाल

दैनिक भास्कर से बातचीत में हर्षा रिछारिया ने आज के धार्मिक माहौल पर सवाल उठाते हुए कहा कि हमें युवा पीढ़ी को त्याग, साधना और तप का रास्ता दिखाना चाहिए, लेकिन इसके उलट हम उन्हें 4-5 करोड़ की लग्जरी गाड़ियां दिखा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे गलत संदेश जा रहा है कि धर्म के रास्ते पर चलो और करोड़ों कमाओ। हर्षा के मुताबिक, सनातन का मतलब सादगी, आत्मसंयम और सेवा है, न कि वैभव और दिखावा।

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सनातन प्रचार छोड़ने का ऐलान कर मचाया था हलचल

हर्षा रिछारिया ने 12 जनवरी को एक वीडियो जारी कर सनातन धर्म के प्रचार से दूरी बनाने का ऐलान किया था। वीडियो में उन्होंने कहा था कि बीते एक साल में उन्हें लगातार विरोध और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि मौनी अमावस्या के बाद वह धर्म प्रचार के रास्ते से हट जाएंगी और अपने पुराने प्रोफेशन यानी एंकरिंग में वापस लौटेंगी। इस ऐलान के बाद सोशल मीडिया पर उनके फैसले को लेकर तीखी बहस छिड़ गई थी।

एंकरिंग के साथ धर्म प्रचार का रास्ता

अब हर्षा का कहना है कि वह धर्म को छोड़ नहीं रहीं, बल्कि उसका तरीका बदल रही हैं। उनका मानना है कि अगर कोई महिला आत्मनिर्भर होकर धर्म के लिए काम करे, तो उसका असर ज्यादा मजबूत होता है। उन्होंने साफ कहा कि वह किसी से आर्थिक मदद नहीं मांगना चाहतीं, बल्कि अपनी मेहनत से आगे बढ़कर सनातन के मूल्यों को समाज तक पहुंचाना चाहती हैं।

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युवाओं के लिए संदेश

हर्षा रिछारिया का कहना है कि युवाओं को यह समझना जरूरी है कि धर्म केवल बाहरी दिखावे का नाम नहीं है। साधना का असली मतलब भीतर की यात्रा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनका यह फैसला युवाओं को आत्मनिर्भर बनने और सच्चे अर्थों में धर्म को समझने की प्रेरणा देगा।

Location : 
  • Prayagraj

Published : 
  • 27 January 2026, 2:03 AM IST

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