गोरखपुर स्थित ऐतिहासिक रामगढ़ताल झील में बड़ी संख्या में मछलियों के मरने की घटना पर कांग्रेस पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष विश्व विजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा बताया है। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन और सरकार झील के संरक्षण को लेकर पूरी तरह असंवेदनशील हो चुकी है।

रामगढ़ताल में मछलियों की मौत
Gorakhpur: राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना में शामिल गोरखपुर के ऐतिहासिक रामगढ़ताल में हाल के दिनों में बड़ी संख्या में मछलियों के मरने की घटना ने एक बार फिर प्रशासन और सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस गंभीर पर्यावरणीय संकट को लेकर कांग्रेस पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष विश्व विजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा बताया है।
विश्व विजय सिंह ने अपने पोस्ट में कहा कि रामगढ़ताल जैसी महत्वपूर्ण झील में मछलियों का इस तरह मरना बेहद चिंताजनक है। यह साफ संकेत है कि स्थानीय प्रशासन और सरकार झील के संरक्षण को लेकर पूरी तरह असंवेदनशील हो चुकी है। उन्होंने लिखा कि ऐतिहासिक रामगढ़ताल की “सेहत” लगातार बिगड़ती जा रही है, लेकिन जिम्मेदारों की नींद नहीं टूट रही।
उन्होंने सवाल उठाया कि ताल में घूमते फ्लोटिंग होटल, रातभर जगमगाती लाइटों की चकाचौंध और ताल किनारे आयोजित हो रहे उत्सवों में प्रशासन और सरकार पूरी तरह मस्त है, लेकिन एक मरती हुई झील की चिंता करने का समय किसी के पास नहीं है। पर्यटन और दिखावे के नाम पर रामगढ़ताल पर लगातार दबाव बढ़ाया जा रहा है, जिससे जल प्रदूषण, ऑक्सीजन की कमी और जैव विविधता को भारी नुकसान हो रहा है।
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कांग्रेस नेता ने कहा कि राष्ट्रीय झील संरक्षण योजना में शामिल होने के बावजूद यदि रामगढ़ताल की यह स्थिति है, तो सरकार की नीयत और निगरानी दोनों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। झील में गिर रहे सीवर, प्लास्टिक कचरा, रसायनिक अपशिष्ट और अनियंत्रित गतिविधियां मछलियों की मौत का प्रमुख कारण बन रही हैं। इसके बावजूद प्रशासन केवल औपचारिक बयान देकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहा है।
विश्व विजय सिंह ने मांग की कि रामगढ़ताल में हुए इस पर्यावरणीय नुकसान की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो। साथ ही झील के संरक्षण के लिए ठोस और दीर्घकालिक कार्ययोजना बनाई जाए, न कि केवल पर्यटन को बढ़ावा देने के नाम पर इसके प्राकृतिक स्वरूप से खिलवाड़ किया जाए।
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स्थानीय लोगों का भी कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो रामगढ़ताल आने वाले वर्षों में एक “मरी हुई झील” में तब्दील हो सकता है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन और सरकार अब भी जागेगी, या फिर विकास और आयोजन की चकाचौंध में रामगढ़ताल यूं ही दम तोड़ता रहेगा?