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पुराना केस, बड़ा फैसला
Gorakhpur: वर्ष 2014 में थाना बेलीपार में दर्ज अवैध शस्त्र रखने के मामले में करीब 12 वर्ष बाद न्यायालय ने अभियुक्त को दोषी करार देते हुए सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। जिला एवं सत्र न्यायालय गोरखपुर ने दोषी पर सात हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। पुलिस की प्रभावी पैरवी और मॉनिटरिंग सेल की लगातार निगरानी को इस दोषसिद्धि में महत्वपूर्ण माना गया है।
पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन कनविक्शन” अभियान के क्रम में हुई। थाना बेलीपार में वर्ष 2014 में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 435/1Gorakhpur त था। मामले में डवरपार, थाना बेलीपार निवासी आशुतोष पांडे पुत्र मिथिलेश पांडे अभियुक्त था।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष उपलब्ध साक्ष्यों और अभिलेखों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। पुलिस के थाने के पैरोकार तथा मॉनिटरिंग सेल द्वारा मामले की पैरवी पर लगातार नजर रखी गई।
सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने अभियुक्त आशुतोष पांडे को अपराध का दोषी पाया और उसे सात वर्ष के सश्रम कारावास तथा सात हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक गंभीर आपराधिक मामलों में दोषियों को सजा दिलाने के लिए अभियोजन और पुलिस की ओर से प्रभावी पैरवी पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में लंबित मुकदमों की निगरानी, साक्ष्यों की प्रस्तुति तथा न्यायालय में अभियोजन पक्ष की पैरवी को मजबूत किया जा रहा है।
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पुलिस ने बताया कि उक्त मामले में अभियुक्त को दोषसिद्ध कराने में डीजीसी प्रियानन्द सिंह और एडीजीसी जयनाथ यादव का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। पुलिस का कहना है कि “ऑपरेशन कनविक्शन” के तहत ऐसे मामलों में प्रभावी पैरवी जारी रखते हुए अपराधियों को न्यायालय से दंडित कराने की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
Location : Gorakhpur
Published : 25 September 2026, 1:33 AM IST