
एसडीएम सदर
Balrampur: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने न्यायिक आदेशों की अवहेलना और भ्रामक जानकारी देने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए बलरामपुर के एसडीएम सदर हेमंत कुमार गुप्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होने का फरमान सुनाया है। न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया ने एसडीएम द्वारा दाखिल किए गए अनुपालन शपथपत्र को अधूरा और अपर्याप्त बताते हुए उसे सिरे से खारिज कर दिया।
पारदर्शी कार्यवाही नहीं
यह पूरा विवाद बलरामपुर के राम धीरज त्रिपाठी द्वारा दायर की गई एक अवमानना याचिका राम धीरज त्रिपाठी बनाम एसडीएम से जुड़ा है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि न्यायालय के पुराने आदेशों के बावजूद प्रशासन जमीन के मामले में पारदर्शी कार्यवाही नहीं कर रहा है। सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि प्रशासन ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि संबंधित भूमि का वास्तव में अधिग्रहण हुआ है या नहीं।
दस्तावेजों में भूमि अधिग्रहण
गत 29 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान न्यायालय ने नाराजगी जताते हुए कहा कि एसडीएम द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों में भूमि अधिग्रहण से संबंधित अनिवार्य अधिसूचना संलग्न नहीं थी। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुख्य बिंदु को स्पष्ट किए बिना दाखिल किया गया शपथपत्र केवल समय व्यर्थ करने जैसा है।
2,000 रुपये का अर्थदंड
उल्लेखनीय है कि इसी मामले में पूर्व में भी लापरवाही बरतने पर उच्च न्यायालय ने एसडीएम पर 2,000 रुपये का अर्थदंड लगाया था। हालांकि अधिकारी ने डिमांड ड्राफ्ट के जरिए जुर्माना भर दिया, लेकिन कोर्ट के मूल आदेश का अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया।
अदालत ने अब इस मामले में अवमानना की कार्यवाही को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। एसडीएम सदर को आगामी 11 मई को न्यायालय के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। अगली सुनवाई पर न्यायालय यह तय करेगा कि अधिकारी के खिलाफ अवमानना के आरोप तय किए जाएं या नहीं। इस आदेश के बाद से ही प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है।
Location : Balrampur
Published : 1 May 2026, 5:38 PM IST