
सुप्रीम कोर्ट (Img : pinterest)
Noida : छात्रा की हिरासत से शुरू हुआ मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA के तहत एक छात्रा को हिरासत में रखने के मामले में नोएडा की जिलाधिकारी मेधा रूपम के रवैये पर बेहद सख्त टिप्पणी की थी। कोर्ट ने यहां तक कहा कि अगर नौकरशाही का ऐसा बेलगाम और तानाशाही रवैया जारी रहा तो उत्तर प्रदेश एक दिन ‘ऑर्वेलियन डिस्टोपिया’ में बदल सकता है। अब इसी फैसले को DM ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
मामला अप्रैल का है। नोएडा में मजदूरों के वेतन में बढ़ोतरी की मांग को लेकर एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुआ था। इसी मामले में दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में ग्रेजुएशन कर चुकी 25 वर्षीय छात्रा आकृति चौधरी को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद 13 मई को उत्तर प्रदेश पुलिस ने आकृति चौधरी और सामाजिक कार्यकर्ता-पत्रकार सत्य वर्मा पर NSA लगा दिया।
2 सितंबर को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आकृति चौधरी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर फैसला सुनाते हुए उनकी हिरासत रद्द कर दी। कोर्ट ने कहा कि हिरासत की पूरी कार्रवाई राज्य की ओर से ‘गढ़ी गई’ कहानी पर आधारित थी। अदालत की टिप्पणियां प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली थीं।
हाई कोर्ट ने आकृति चौधरी को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। साथ ही निर्देश दिया कि यह रकम DM मेधा रूपम, SHO और मामले की कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अन्य अधिकारियों के वेतन से काटी जाए। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों के सर्विस रिकॉर्ड में अपनी नाराजगी दर्ज करने का निर्देश भी दिया।
कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों की निष्ठा राजनीतिक कार्यपालिका के बजाय संविधान के प्रति होनी चाहिए। अदालत ने लोकतंत्र में जनता को मालिक और अधिकारियों को उनका सेवक बताया। अब DM मेधा रूपम ने हाई कोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
Location : Noida
Published : 13 September 2026, 5:00 PM IST