
यूपी में पहले भी कई नौकरशाह बदल चुके हैं सियासी पारी (Img: AI Generated Image)
Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूर्व नौकरशाहों की एंट्री कोई नई बात नहीं है, लेकिन पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के हालिया ऐलान ने इस चर्चा को फिर तेज कर दिया है। 2013 बैच की यूपी कैडर की अधिकारी रहीं दिव्या मित्तल ने करीब 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद राजनीति में आने का फैसला किया है। उन्होंने साफ कहा है कि वह किसी राजनीतिक दल के साथ नहीं जाएंगी और लोगों के साथ मिलकर स्वतंत्र राजनीतिक मंच खड़ा करेंगी।
दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश को अपनी ‘कर्मभूमि’ बताते हुए कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा यहीं से शुरू होगी। उन्होंने प्रशासनिक सेवा के दौरान देखी गई उन समस्याओं का जिक्र किया, जिनके समाधान के लिए मंजूरी और बजट होने के बावजूद काम आगे नहीं बढ़ पाता। उनका कहना है कि राजनीति के जरिए वह उन लोगों की आवाज बनना चाहती हैं, जिनकी शिकायतें सरकारी व्यवस्था तक पहुंचने के बाद भी अनसुनी रह जाती हैं।
दिव्या मित्तल की सियासत में एंट्री के बाद उनके चुनाव लड़ने को लेकर चर्चा जरूर तेज है। हालांकि उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में उन्होंने किसी खास विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। उन्होंने स्वतंत्र तरीके से राजनीति करने और जनता के साथ मिलकर काम करने की बात कही है। इसलिए फिलहाल उनकी भूमिका को लेकर तस्वीर उनके अगले राजनीतिक कदमों से और साफ होगी।
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उनके ऐलान का समय भी महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है। ऐसे में प्रशासनिक सेवा छोड़कर राजनीति में आई एक चर्चित पूर्व अधिकारी का स्वतंत्र मंच बनाना आने वाले महीनों में चर्चा का विषय बना रह सकता है।
दिव्या मित्तल अकेली पूर्व नौकरशाह नहीं हैं जो हाल के दिनों में राजनीति की ओर बढ़े हैं। पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. राकेश वर्मा ने सितंबर 2026 में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। यूपी कैडर के पूर्व अधिकारी के पार्टी में शामिल होने की जानकारी कांग्रेस की ओर से भी सामने आई थी।
उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक सेवा से राजनीति में आने वाले कई नाम पहले से मौजूद हैं। पूर्व आईपीएस अधिकारी असीम अरुण ने पुलिस सेवा छोड़कर भाजपा की राजनीति में प्रवेश किया और 2022 में कन्नौज सदर से विधानसभा चुनाव जीता। वह उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री हैं। वहीं गुजरात कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी अरविंद कुमार शर्मा भी भाजपा में आने के बाद उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य बने और राज्य सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
पूर्व आईपीएस अधिकारी बृजलाल भी राजनीति में सक्रिय रहे हैं। वह उत्तर प्रदेश के डीजीपी रह चुके हैं और 2020 में भाजपा के टिकट पर राज्यसभा पहुंचे थे। वर्तमान में उनका राज्यसभा कार्यकाल नवंबर 2026 में पूरा होना है और आगामी चुनाव को लेकर उनके नाम की चर्चा भी रिपोर्टों में हुई है।
पूर्व नौकरशाहों के राजनीतिक सफर का रिकॉर्ड एक जैसा नहीं रहा है। कुछ अधिकारियों ने चुनाव जीतकर विधानसभा या संसद तक जगह बनाई, जबकि कुछ को चुनावी राजनीति में सफलता नहीं मिली। यही वजह है कि प्रशासनिक अनुभव के बाद राजनीति में उतरना अपने आप में चुनावी सफलता की गारंटी नहीं माना जा सकता।
केरल कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी अल्फोंस कन्ननथनम का उदाहरण भी अक्सर दिया जाता है। उन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद निर्दलीय विधायक के तौर पर चुनाव जीता और बाद में भाजपा में शामिल हुए। इसके बाद वह राज्यसभा पहुंचे और केंद्र सरकार में मंत्री भी बने।
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इसके अलावा, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, यशवंत सिन्हा (1960 बैच), अजीत जोगी (1968 बैच), अल्फोंज कन्नाथानम (1979 बैच), आर के सिंह भी इसमें शामिल हैं।
दिव्या मित्तल के मामले में फिलहाल सबसे अहम बात उनका किसी दल में शामिल होने के बजाय स्वतंत्र राजनीतिक मंच बनाने का फैसला है। उन्होंने जनता से जुड़ने और लोगों की समस्याओं को राजनीतिक मुद्दों के रूप में उठाने की बात कही है।
Location : Lucknow
Published : 30 September 2026, 3:33 PM IST