Deoria Flood: अगर नदी का दबाव यूं ही बढ़ा तो मुश्किल होगी! देवरिया में बढ़ते जलस्तर से सहमे ग्रामीण

देवरिया में घाघरा, राप्ती और गोर्रा नदियों के बढ़ते जलस्तर ने तटवर्ती गांवों की चिंता बढ़ा दी है। कई जगह खेतों में पानी पहुंचने लगा है, जबकि ग्रामीण तटबंधों की मजबूती को लेकर सवाल उठा रहे हैं। लोगों को डर है कि नदी का दबाव बढ़ने पर कमजोर हिस्सों में कटान की स्थिति बन सकती है।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 21 August 2026, 1:47 PM IST

Deoria: पूर्वांचल में लगातार बढ़ रहे नदियों के जलस्तर ने एक बार फिर बाढ़ की आशंका को लेकर आम जनमानस की चिंता बढ़ा दी है। देवरिया जनपद में घाघरा (सरयू), राप्ती और गोर्रा समेत प्रमुख नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी से तटवर्ती और निचले इलाकों के ग्रामीण सहमे हुए हैं। हाल के दिनों में भी जिले में नदियों के बढ़ते जलस्तर और तटबंधों की स्थिति को लेकर चिंता सामने आई है।

नदियों के किनारे बसे निचले स्तर के गांवों तथा खेतों में पानी का दबाव दिखाई देने लगा है। कई स्थानों पर खेतों में पानी पहुंचने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। धान सहित अन्य फसलों पर भी जलभराव का खतरा मंडराने लगा है। किसानों का कहना है कि यदि जलस्तर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

तटबंधों की हालत पर उठ रहे सवाल

दोआबा क्षेत्र सहित नदी किनारे के कई इलाकों में ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ संवेदनशील स्थानों पर तटबंधों की समय रहते पर्याप्त मरम्मत और मजबूती नहीं कराई गई। हाल में देवरिया में कुछ बांधों की जर्जर स्थिति और धंसने की आशंका को लेकर ग्रामीणों की चिंता भी सामने आई थी।

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ग्रामीण रामजी यादव बहोरा दलपतपुर, सभापति प्रसाद, राजू साहनी, चंद्रशेखर जायसवाल, सुनील श्रीवास्तव, शीतल माझा, देवानंद सिंह कपरवार घाट बिनवा पुरी, विनय यादव, अजय,का कहना है कि बाढ़ के समय तटबंधों पर नदी का दबाव अचानक बढ़ जाता है। ऐसे में अगर कमजोर हिस्सों की तत्काल मरम्मत नहीं की गई तो कटान या तटबंध टूटने की स्थिति पैदा हो सकती है। इसका सीधा असर किसानों की फसलों, मजदूरों की रोजी-रोटी, व्यापारियों के कारोबार और विद्यार्थियों की आवाजाही पर पड़ सकता है।

प्रशासन से ग्रामीणों की सीधी मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन और सिंचाई विभाग, बाढ़ खंड विभाग, लोक निर्माण विभाग से मांग की है कि संवेदनशील तटबंधों का तत्काल स्थलीय निरीक्षण कराया जाए। जहां भी कटान, धंसान या कमजोर हिस्से दिखाई दे रहे हैं, वहां युद्धस्तर पर मरम्मत कराई जाए। साथ ही नदी के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखते हुए संभावित बाढ़ प्रभावित गांवों में राहत और बचाव की व्यवस्था पहले से तैयार रखी जाए।

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जिले की आपदा प्रबंधन व्यवस्था 

ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ आने के बाद बचाव कार्य शुरू करने से बेहतर है कि खतरे को पहले ही  सावधानियों को लेकर दिशा-निर्देश उपलब्ध हैं। ऐसे में ग्रामीणों का कहना है कि कागजी तैयारियों के बजाय संवेदनशील तटबंधों और गांवों में जमीनी स्तर पर तैयारी दिखाई देनी चाहिए। भांपकर कमजोर तटबंधों को मजबूत कर दिया जाए। अगर प्रशासन ने समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए तो बढ़ता नदी जलस्तर किसानों, मजदूरों, व्यापारियों और विद्यार्थियों के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है।

Location :  Deoria

Published :  21 August 2026, 1:47 PM IST