देवरिया में शाम 6 बजे ब्लैकआउट मॉक ड्रिल के दौरान शहर, कस्बों और गांवों में अंधेरा छा गया। सायरन, बुझी लाइटें और प्रशासन का अलर्ट मोड- यह अभ्यास हवाई हमले जैसी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी का हिस्सा है।

जनपद में ब्लैकआउट मॉक ड्रिल
Deoria: उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर शाम 6:00 बजे से पूरे प्रदेश में ब्लैकआउट मॉक ड्रिल आयोजित की गई, जिसमें जनपद देवरिया भी शामिल रहा। मॉक ड्रिल का उद्देश्य हवाई हमले जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में नागरिकों और प्रशासनिक तंत्र को तैयार करना और दुश्मन के सामने लोकेशन को छुपाने की रणनीति का अभ्यास करना है।
जैसे ही सायरन की आवाज गूंजती है, लोग अपने घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों की लाइटें बंद कर देते हैं। देवरिया में इस दौरान शहर, कस्बे और ग्रामीण इलाकों में चारों ओर अंधेरा छा गया। नागरिकों ने प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए संयम और अनुशासन के साथ लाइटें बंद कीं।
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इस दौरान प्रशासनिक अमला पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आया। सिविल डिफेंस, होमगार्ड, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के अधिकारी और कर्मचारी आपसी समन्वय के साथ अभ्यास में जुटे हुए थे। सभी विभागों ने तय दिशानिर्देशों के अनुसार आपातकालीन संचालन को परखा और अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी रखी।
ब्लैकआउट मॉक ड्रिल का मकसद केवल लाइट बंद करना नहीं है। यह नागरिक सुरक्षा और आपातकालीन तैयारी का अभ्यास है। ड्रिल के दौरान यह देखा गया कि लोग कितनी तेजी और अनुशासन के साथ लाइट बंद कर रहे हैं। इसके अलावा प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया कि आपातकालीन सेवाओं जैसे एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए तत्पर रहें।
देवरिया में इस ड्रिल में विभिन्न विभागों का समन्वय और सहयोग महत्वपूर्ण रहा। स्वास्थ्य विभाग ने फील्ड में तैनाती कर संभावित आपात स्थिति का अभ्यास किया, वहीं फायर ब्रिगेड ने आग बुझाने और बचाव संचालन की प्रक्रिया को दोहराया। होमगार्ड और सिविल डिफेंस ने शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों की सहायता करने के लिए कदम उठाए।
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मॉक ड्रिल के दौरान नागरिकों का भरपूर सहयोग रहा। अधिकांश लोगों ने प्रशासनिक निर्देशों का पालन करते हुए अपने घरों और प्रतिष्ठानों की लाइटें समय पर बंद कीं। बच्चों और बुजुर्गों समेत हर वर्ग ने अभ्यास में भाग लेकर सुरक्षा और तैयारी की भावना को बढ़ाया।