बाल विवाह पर सख्ती, बेटियों के अधिकारों को लेकर हाथरस में प्रशासन का बड़ा अभियान

हाथरस के मुरसान विकासखंड में ब्लॉक बाल संरक्षण समिति, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और बाल विवाह टास्कफोर्स की संयुक्त बैठक आयोजित हुई। अधिकारियों ने बाल विवाह रोकने, बेटियों की शिक्षा-सुरक्षा, सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने, बाल संरक्षण तंत्र मजबूत करने और बच्चों को डिजिटल लत से बचाने पर जोर दिया।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 5 August 2026, 4:54 PM IST

Hathras: बेटियों की सुरक्षा में जरा सी चूक कई बार उनकी पूरी जिंदगी पर भारी पड़ जाती है। कहीं बाल विवाह की घटनाएं सामने आती हैं तो कहीं शिक्षा से वंचित बच्चियां अपने अधिकारों से दूर रह जाती हैं। ऐसे मामलों को रोकने और बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए हाथरस के मुरसान विकासखंड में बुधवार को ब्लॉक बाल संरक्षण समिति, 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान और बाल विवाह टास्कफोर्स की संयुक्त बैठक एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान अधिकारियों ने साफ कहा कि सिर्फ सरकारी योजनाएं बनाना काफी नहीं है, बल्कि उन्हें जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है।

बाल संरक्षण को मजबूत करने पर दिया गया जोर

विकासखंड मुरसान के सभागार में आयोजित बैठक में बाल संरक्षण, महिला सुरक्षा, बेटियों की शिक्षा और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता खंड विकास अधिकारी नरेंद्र शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि बच्चों और महिलाओं तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा।

मोबाइल और टीवी की लत पर भी जताई चिंता

बैठक के दौरान खंड विकास अधिकारी नरेंद्र शर्मा ने बदलते सामाजिक माहौल को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज के समय में बच्चे मोबाइल, टीवी और अन्य डिजिटल उपकरणों पर जरूरत से ज्यादा समय बिता रहे हैं, जिसका असर उनके मानसिक और सामाजिक विकास पर पड़ रहा है।

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आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दी गई अहम जिम्मेदारी

सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) भीष्म नारायण सिंह ने बैठक में मौजूद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पात्र परिवारों की पहचान करें और उन्हें सरकार की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दें। उन्होंने कहा कि कई बार जानकारी के अभाव में जरूरतमंद लोग सरकारी योजनाओं से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि वे सक्रिय रहकर लोगों को जागरूक करेंगी तो ज्यादा से ज्यादा लाभार्थियों को योजनाओं का फायदा मिल सकेगा।

बेटियों को बराबरी का अवसर देना समाज की जिम्मेदारी

महिला कल्याण विभाग की जिला मिशन समन्वयक मोनिका दीक्षित ने कहा कि बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए केवल सरकार नहीं बल्कि पूरे समाज को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने कहा कि लड़कियों को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान का समान अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने बैठक में मौजूद सभी प्रतिभागियों को महिला एवं बाल विकास से जुड़ी विभिन्न सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना, रानी लक्ष्मीबाई एवं बाल सम्मान कोष जैसी योजनाओं के उद्देश्य और पात्रता के बारे में विस्तार से बताया।

दत्तक ग्रहण की कानूनी प्रक्रिया पर किया गया जागरूक

कार्यक्रम में विशेष दत्तक ग्रहण इकाई की सामाजिक कार्यकर्ता प्रीति गोयल ने बच्चों को गोद लेने की वैधानिक प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे को गोद लेने के लिए केवल कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।

उन्होंने बताया कि अवैध तरीके से दत्तक ग्रहण करना कानूनन अपराध है। यदि कोई परिवार किसी बच्चे को गोद लेना चाहता है तो उसे निर्धारित प्रक्रिया अपनानी चाहिए, जिससे बच्चे का भविष्य सुरक्षित रह सके और उसके सभी अधिकार भी सुरक्षित रहें।

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ग्राम स्तर पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश

सुपरवाइजर शशिप्रभा ने बैठक में मौजूद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि वे महिला कल्याण विभाग की योजनाओं के अधिक से अधिक आवेदन कराएं। साथ ही ग्राम बाल संरक्षण समिति की बैठकों का नियमित आयोजन कर उनका कार्यवृत्त समय पर प्रस्तुत करें।

बाल विवाह रोकने और जागरूकता बढ़ाने पर विशेष फोकस

बैठक का मुख्य उद्देश्य बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत करना, बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों पर प्रभावी रोक लगाना और बेटियों के अधिकारों के प्रति लोगों को जागरूक बनाना रहा। अधिकारियों ने कहा कि जब तक समाज खुद आगे आकर बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा की जिम्मेदारी नहीं निभाएगा, तब तक इन अभियानों का पूरा उद्देश्य सफल नहीं हो पाएगा।

Location :  Hathras

Published :  5 August 2026, 4:54 PM IST