अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायबरेली के नाक, कान, गला विभाग ने एक युवा में कोब्लेशन टेक्नोलॉजी का उपयोग करके एंडोस्कोपिक तरीके से एक जटिल नेज़ोफेरिंजियल ट्यूमर को सफलतापूर्वक हटाकर स्कल-बेस सर्जरी में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है।

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Raebareli: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायबरेली के नाक, कान, गला विभाग ने एक युवा में कोब्लेशन टेक्नोलॉजी का उपयोग करके एंडोस्कोपिक तरीके से एक जटिल नेज़ोफेरिंजियल ट्यूमर को सफलतापूर्वक हटाकर स्कल-बेस सर्जरी में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। यह पहली बार है जब एम्स, रायबरेली में सर्जरी के लिए कोब्लेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है।
एम्स पीआरओ ने बताया कि मरीज एक 20 साल का छात्र था जिसे नाक बंद होने और बार-बार नाक से खून आने की समस्या थी। एम्स आने पर बताया गया कि उसे नेज़ोफेरिंजियल एंजियोफाइब्रोमा है। नाक, कान, गला विभाग की प्रमुख डॉ. अनन्या सोनी ने बताया कि इस यह किशोर लड़कों में होने वाला नाक के पीछे का एक दुर्लभ लेकिन आक्रामक ट्यूमर है। यह रक्त वाहिकाओं से बना होता है, जिससे नाक से अत्यधिक खून बहना और नाक बंद होने जैसे मुख्य लक्षण होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह ट्यूमर स्कल-बेस की विभिन्न संरचनाओं को खराब कर देता है और इसके दोबारा होने की दर अधिक होती है। कोब्लेशन टेक्नोलॉजी ऐसे ट्यूमर को अत्यधिक सटीकता और न्यूनतम ब्लीडिंग के साथ पूरी तरह से हटाने में मदद करती है।
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सर्जिकल टीम का नेतृत्व विभागाध्यक्षा डॉ. अनन्या सोनी और डॉ. अरिजीत जोतदार ने किया और इसमें डॉ. ध्रुव कपूर, डॉ. आस्था, डॉ. निखिल और डॉ. प्रभात शामिल थे। एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कालीचरण दास ने किया। डॉ. पल्लव, डॉ. अनुषा और डॉ. शिवप्रसाद भी इस सर्जरी में शामिल रहे। नर्सिंग ऑफिसर अमिता, सारिका और संजू भी ऑपरेशन के दौरान मौजूद रहे।
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विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अरिजीत जोतदार ने कहा कि तीन घंटे के इस ऑपरेशन में लगभग 4 सेमी आकार का स्कल बेस ट्यूमर को दूरबीन विधि द्वारा बिना किसी बाहरी निशान से पूरी तरह से हटा दिया गया। पूरी सर्जरी में खून का नुकसान भी बहुत कम हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे ट्यूमर सर्जन के लिए हमेशा एक चुनौती होते हैं क्योंकि यह स्कल बेस पर विभिन्न महत्वपूर्ण नसों और रक्त वाहिकाओं के पास होता है। सभी संरचनाओं को संरक्षित करते हुए एंडोस्कोपिक तरीके से ट्यूमर को हटाने के लिए निश्चित सर्जिकल कौशल की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि कोब्लेशन टेक्नोलॉजी का उपयोग पूरे ट्यूमर को सफलतापूर्वक हटाने में बहुत मददगार था।