बलरामपुर में धर्मसत्ता की हुंकार, शंकराचार्य ने मंच से उठाए गंभीर सवाल; छिड़ गई नई बहस

बलरामपुर पहुंचे ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने संबोधन में कई संवेदनशील और चर्चित मुद्दों पर खुलकर बात की। मंदिर व्यवस्था, गौ संरक्षण, संस्कृति और धर्मसत्ता की भूमिका को लेकर उनके बयान ने नई चर्चा छेड़ दी है।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 15 July 2026, 3:42 PM IST

Balrampur: ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बलरामपुर पहुंचे। उन्होंने संबोधन के दौरान, कई ऐसे विषयों पर चर्चा की। अपने भाषण में उन्होंने धर्म, संस्कृति, मंदिर व्यवस्था और गौ संरक्षण जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी।

जिले में उनके स्वागत के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग मौजूद रहे। तुलसीपुर में समाजवादी पार्टी नेता भानु तिवारी ने उनका स्वागत और अभिनंदन किया। कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों ने शंकराचार्य के दर्शन किए और उनके विचार सुने।

मंदिर व्यवस्था को लेकर उठाए सवाल

अपने संबोधन के दौरान शंकराचार्य ने अयोध्या में मंदिर निर्माण और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इतने बड़े और ऐतिहासिक धार्मिक कार्य में अनुभव रखने वाले लोगों की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण होनी चाहिए थी। उन्होंने मंदिर प्रबंधन से जुड़े विवादों को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि इस तरह के मामलों को केवल सामान्य वित्तीय गड़बड़ी मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, धार्मिक आस्था से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों जरूरी हैं।

बाबा बनकर लोगों को फंसाने वाले ठगों का खेल खत्म, जीजा-साले की चालाकी का हुआ पर्दाफाश

गौ संरक्षण पर जताई चिंता

शंकराचार्य ने अपने भाषण में गौवंश के संरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि चुनावी मंचों पर गाय को सम्मान देने की बात की जाती है, लेकिन व्यवहारिक स्तर पर कई जगह स्थिति अलग दिखाई देती है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज और सरकार, दोनों की जिम्मेदारी है कि गौ संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। साथ ही मांस निर्यात के मुद्दे पर भी चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने इस विषय पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत बताई।

'धर्मसत्ता किसी राजनीतिक दल की नहीं'

अपने ऊपर लगने वाले राजनीतिक आरोपों का जवाब देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि धर्मसत्ता का काम किसी भी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध करना नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर कोई नीति समाज, संस्कृति या धार्मिक मूल्यों के हित में नहीं होगी, तो उस पर सवाल उठाना संत समाज का दायित्व है। उन्होंने यह भी कहा कि संस्कृति का संरक्षण केवल बड़े निर्माण कार्यों या आर्थिक संसाधनों से नहीं होता, बल्कि नैतिक मूल्यों और समाज की आस्था को मजबूत करने से होता है।

मरीज इंतज़ार करते रहे, स्ट्रेचर करता रहा ईंटों की ढुलाई? मथुरा से सामने आई चौंकाने वाली तस्वीर

आंदोलन से जुड़े लोगों का भी किया जिक्र

शंकराचार्य ने उन लोगों का भी उल्लेख किया, जिन्होंने धार्मिक आंदोलनों में अपनी भूमिका निभाई, लेकिन बाद में उन्हें पर्याप्त सम्मान नहीं मिला। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े सामाजिक या धार्मिक अभियान में योगदान देने वालों को भुलाया नहीं जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने प्राचीन मंदिरों और धार्मिक स्थलों के संरक्षण पर भी जोर दिया और कहा कि विकास कार्यों के दौरान ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों की सुरक्षा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

Location :  Balrampur

Published :  15 July 2026, 3:41 PM IST