बलरामपुर में बड़ा घोटाला: अधिवक्ता राहत कोष से लाखों की हेराफेरी! पूर्व संयोजक पर फर्जीवाड़े की साजिश का शक

बलरामपुर में अधिवक्ता राहत समिति के खाते से 8.75 लाख रुपये के कथित गबन ने पूरे वकील समाज को झकझोर दिया है। पूर्व संयोजक पर फर्जी चेक, नकली हस्ताक्षर और बैंक से मिलीभगत के गंभीर आरोप लगे हैं। बैंक स्टेटमेंट और सीसीटीवी फुटेज ने मामले को और पेचीदा बना दिया है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 12 June 2026, 1:09 PM IST

Balrampur: ​कानून की रक्षा करने वाले जब खुद को ठगा हुआ महसूस करें, तो व्यवस्था के माथे पर चिंता की लकीरें उभरना लाजिमी है। बलरामपुर जनपद में एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन, जिला बार एसोसिएशन और अधिवक्ता समाज को झकझोर कर रख दिया है।

यह कहानी किसी आम धोखाधड़ी की नहीं, बल्कि वकीलों के कल्याण के लिए बनी अधिवक्ता आपदा राहत समिति के बैंक खाते में सेंधमारी की है।

बलरामपुर पुलिस को दी तहरीर

​मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस गबन के खिलाफ कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन व जिला बार एसोसिएशन के दिग्गजों ने एकजुट होकर पुलिस का दरवाजा खटखटाया है। घटना के संबंध में अलग-अलग शिकायती पत्र सौंपे गए हैं, जिनमें मुख्य रूप से पूर्व अध्यक्ष जिला बार एसोसिएशन अजय बहादुर सिंह, अधिवक्ता आपदा राहत समिति के अध्यक्ष कमलेश्वर सिंह व सचिव मुर्तजा हुसैन खान और पूर्व सचिव राहत कोष रमेश चन्द्र त्रिपाठी की तरफ से प्रभारी निरीक्षक, कोतवाली नगर, बलरामपुर को लिखित तहरीर दी गई है।

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घटना में ये नाम आया सामने

​इस पूरे मामले में समिति के पूर्व संयोजक शशांक कुमार त्रिपाठी का नाम उभरकर सामने आया है, जिन्हें आम सभा द्वारा 12 दिसंबर 2025 को ही पद से हटा दिया गया था। शिकायतों के मुताबिक, पद से हटने के बाद भी शशांक कुमार त्रिपाठी ने कथित रूप से अनाधिकृत और गुप्त रूप से यूपी ग्रामीण बैंक, शाखा बलरामपुर से समिति की चेकबुक के कुल 50 चेक प्राप्त कर लिए।

आरोप है कि इन चेकों को अन्य पदाधिकारियों की जानकारी में लाए बिना अपने पास छिपाकर रखा गया और फिर शुरू हुआ कूटरचना और फर्जीवाड़े का एक सुनियोजित खेल। दर्ज कराई गई शिकायतों में यह साफ तौर पर कहा गया है कि शशांक कुमार त्रिपाठी ने अपने साथियों के साथ मिलकर एक संगठित गिरोह की तरह काम किया।

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किसके नाम से कितने चेक जारी करवाए?

उन्होंने राम चरित्र (1,00,000 रुपये), राम सूरत (25,000 रुपये), देवी प्रसाद (1,00,000 रुपये), अवधराम (1,00,000 रुपये), लक्ष्मण (1,00,000 रुपये), अक्षय कुमार (50,000 रुपये), अम्बुज (1,00,000 रुपये), शिव शंकर (1,00,000 रुपये), राम सेवक (1,00,000 रुपये) और दुर्गा प्रसाद (1,00,000 रुपये) जैसे विभिन्न व्यक्तियों के नाम से चेक जारी करवाए। इन चेकों पर वर्तमान अधिकृत पदाधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर और कूट रचित मुहर लगाकर, बैंक अधिकारियों से मिलीभगत के जरिए कुल 8,75,000 रुपये की भारी-भगकम राशि राहत कोष से पार कर दी गई।

कैसे हुआ धोखाधड़ी का खुलासा?

​इस बड़ी धोखाधड़ी का पर्दाफाश तब हुआ जब 8 जून 2026 को बैंक स्टेटमेंट निकलवाया गया। इसके बाद 10 जून 2026 को बुलाई गई अधिवक्ता आपदा राहत समिति बलरामपुर की आम सभा की बैठक में जब चेक और हस्ताक्षरों को लेकर अजय बहादुर सिंह, अनिल कुमार शुक्ला और रमेशचन्द्र त्रिपाठी जैसे अधिकृत पदाधिकारियों से पूछताछ की गई, तो सभी ने उन चेकों पर अपने हस्ताक्षर होने से साफ इनकार कर दिया।

हद तो तब हो गई जब बैंक अधिकारियों द्वारा यह पुष्टि की गई कि इन विवादित चेकों को भुनाने के समय पूर्व संयोजक शशांक त्रिपाठी खुद बैंक में मौजूद थे, जिसकी बकायदा सीसीटीवी फुटेज भी उपलब्ध है।

सभी पीड़ितों और पदाधिकारियों ने कड़े शब्दों में इसे एक आपराधिक षड्यंत्र और संगठित अपराध करार देते हुए पुलिस प्रशासन से मांग की है कि इस जालसाजी के मुख्य सूत्रधार शशांक कुमार त्रिपाठी और उनके सहयोगियों के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

Location :  Balrampur

Published :  12 June 2026, 1:09 PM IST