‘रास्ते में हैं साहब और घंटों इंतजार करते लाचार दिव्यांग’! जानिए दो जिलों के प्रभार में छिपा है कौन सा बड़ा प्रशासनिक सच?

बलिया में दिव्यांगजनों की समस्याओं की सुनवाई के लिए अधिकारी की मौजूदगी सप्ताह में महज तीन दिन तय है। लेकिन अगर इन्हीं दिनों में अधिकारी समय पर कार्यालय न पहुंचे तो दूर-दराज से आने वाले दिव्यांग फरियादियों की शिकायतें कौन सुनेगा?

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 10 September 2026, 11:36 AM IST

Ballia: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग से जुड़ी सेवाओं के लिए सप्ताह में सिर्फ तीन दिन अधिकारी की उपलब्धता निर्धारित है, लेकिन इन्हीं दिनों में समय पर कार्यालय नहीं पहुंचने की शिकायतें सामने आ रही हैं। गाजीपुर का अतिरिक्त प्रभार होने के चलते जिला दिव्यांगजन कल्याण अधिकारी पारस नाथ यादव के लिए बलिया में सोमवार, मंगलवार और बुधवार को कार्यालय में उपस्थित रहने का रोस्टर तय किया गया है।

बुधवार दोपहर तक खाली रही अधिकारी की कुर्सी

बुधवार को भी अधिकारी के कार्यालय में समय से मौजूद नहीं होने का मामला सामने आया। जानकारी के मुताबिक, दोपहर करीब 12 बजे तक कार्यालय में अधिकारी की कुर्सी खाली थी। अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर पहुंचे दिव्यांग फरियादी कार्यालय में इंतजार करते रहे। कर्मचारियों से अधिकारी के बारे में पूछने पर उन्हें बताया गया कि अधिकारी अभी रास्ते में हैं।

योजनाओं और पेंशन से जुड़े काम के लिए पहुंचते हैं फरियादी

दिव्यांगजन विभाग से जुड़ी विभिन्न योजनाओं, पेंशन, प्रमाणपत्र, सहायक उपकरण और दूसरी सरकारी सुविधाओं से संबंधित समस्याओं को लेकर लोग अधिकारी के कार्यालय पहुंचते हैं। कई फरियादियों के लिए दूर-दराज के इलाकों से जिला मुख्यालय तक पहुंचना भी आसान नहीं होता। ऐसे में अधिकारी के कार्यालय में नहीं मिलने पर उन्हें काफी देर तक इंतजार करना पड़ता है।

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घंटों इंतजार के बाद खाली हाथ लौटने की शिकायत

फरियादियों का कहना है कि अधिकारी से मिलने के लिए कार्यालय आने के बावजूद यदि समय पर सुनवाई नहीं हो पाती, तो उनका पूरा दिन प्रभावित होता है। कुछ लोगों को कथित तौर पर घंटों इंतजार करने के बाद बिना अपनी समस्या बताए वापस लौटना पड़ता है। इससे दिव्यांग लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

तीन निर्धारित दिनों में भी उपस्थिति पर सवाल

सूत्रों के अनुसार, बलिया में अधिकारी की मौजूदगी के लिए तय तीन दिनों में भी समय पर कार्यालय पहुंचने की स्थिति को लेकर सवाल उठते रहे हैं। दो जिलों का प्रभार होने के कारण अधिकारी की उपलब्धता को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी हैं। हालांकि, समय पर कार्यालय नहीं पहुंचने के इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

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व्यवस्था पर उठ रहा बड़ा सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बलिया में अधिकारी के लिए सप्ताह में केवल तीन दिन निर्धारित किए गए हैं, तो उन दिनों भी यदि वह समय पर कार्यालय में उपलब्ध नहीं रहते हैं, तो अपनी शिकायत लेकर आने वाले दिव्यांगजनों की सुनवाई कैसे होगी। विभाग के लिए जरूरी है कि निर्धारित समय में अधिकारी की उपलब्धता सुनिश्चित हो, ताकि अपनी समस्याएं लेकर आने वाले लोगों को अनावश्यक रूप से इंतजार या दोबारा कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें।

दूर से आने वाले दिव्यांगों की बढ़ जाती है मुश्किल

दिव्यांग लाभार्थियों के लिए विभागीय कार्यालय तक पहुंचना सामान्य फरियादियों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में पहले से निर्धारित दिनों और समय के अनुसार अधिकारी की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है। इससे न केवल फरियादियों का समय बचेगा, बल्कि विभागीय योजनाओं और शिकायत निवारण की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी तरीके से चल सकेगी।

Location :  Ballia

Published :  10 September 2026, 11:36 AM IST