
अयोध्या राम मंदिर (सोर्स- Pinterest)
Ayodhya: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अब अपने प्रबंधन और व्यवस्थाओं को पूरी तरह से पारदर्शी और मजबूत बनाने की तैयारी में जुट गया है। हाल ही में हुए दान विवाद के बाद, मंदिर प्रशासन में लोगों का भरोसा डिगे नहीं, इसके लिए ट्रस्ट को राम मंदिर के इतिहास के पहले चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) की तलाश है। हालांकि, इस महत्वपूर्ण और संवेदनशील पद पर बैठने वाले व्यक्ति के लिए सिर्फ बड़ी डिग्रियां या कॉर्पोरेट जगत का अनुभव ही काफी नहीं होगा। इस पद के लिए सबसे बड़ी और अनिवार्य शर्त 'राम भक्ति' तय की गई है।
सीईओ की खोज के लिए गठित तीन सदस्यीय सर्च कमेटी के सदस्य सुरेश हावरे ने स्पष्ट किया है कि केवल एक 'सूखा प्रोफेशनल' (सिर्फ कॉर्पोरेट या पेशेवर दिमाग वाला व्यक्ति) इस पावन और ऐतिहासिक मंदिर की व्यवस्थाओं को नहीं संभाल सकता।
सर्च कमेटी के सदस्य सुरेश हावरे के अनुसार, इस पद पर आने वाले उम्मीदवार में सबसे पहली और मुख्य खूबी "भगवान राम के प्रति अटूट श्रद्धा का भाव" होनी चाहिए। इसके बाद दूसरी सबसे बड़ी योग्यता समाज के प्रति सेवा का भाव और दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मन में सम्मान होना है। नया सीईओ राम मंदिर मैनेजमेंट की 'रीढ़' की तरह काम करेगा, जिसके कंधों पर मंदिर की पूरी व्यवस्था टिकी होगी।
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राम मंदिर का नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी सिर्फ एक प्रशासनिक अधिकारी नहीं होगा, बल्कि उसे कई मोर्चों पर एक साथ काम करना होगा। उनकी मुख्य जिम्मेदारियों में शामिल हैं:
भीड़ प्रबंधन: अयोध्या आने वाले हर दिन लाखों श्रद्धालुओं के लिए सुगम और सुरक्षित दर्शन की व्यवस्था करना।
आपदा प्रबंधन और मानव संसाधन: आपातकालीन स्थितियों से निपटने की तैयारी और मंदिर के स्टाफ (HR) की देखरेख करना।
वित्तीय प्रबंधन: मंदिर में आने वाले दान, बजट और हर तरह की खरीद-फरोख्त (प्रोक्योरमेंट) की व्यवस्था को पूरी तरह से संभालना।
ट्रस्ट ने इस योग्य व्यक्ति को खोजने के लिए बीती 6 जुलाई को एक उच्च स्तरीय 3 सदस्यीय सर्च कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी में देश के प्रतिष्ठित नाम शामिल हैं-
सुरेश हावरे: सेवानिवृत्त परमाणु वैज्ञानिक (परमाणु ऊर्जा विभाग में 27 साल का अनुभव), शिर्डी के श्री साईंबाबा संस्थान ट्रस्ट के पूर्व प्रमुख, एनआईटी (NIT) रायपुर के चेयरमैन, श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के सदस्य और मंदिर प्रबंधन पर किताब के लेखक।
जब इस कमेटी का गठन हुआ, तब सुरेश हावरे अमरनाथ यात्रा पर थे। उन्होंने बताया कि समिति के अन्य सदस्य दिल्ली में हैं और इस काम को 'टॉप प्रायरिटी' (सर्वोच्च प्राथमिकता) पर रखा गया है। जल्द ही यह कमेटी पहले ऑनलाइन बैठक करेगी और उसके बाद आमने-सामने बैठकर उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम चर्चा करेगी।
सुरेश हावरे का मानना है कि अयोध्या के लिए प्रशासन का एक बिल्कुल अलग और अनूठा मॉडल चाहिए। यह कोई सामान्य नवनिर्मित मंदिर नहीं है, बल्कि इसके पीछे हिंदुओं का 500 वर्षों से अधिक का लंबा संघर्ष और गहरी भावनात्मक आस्था जुड़ी है। आज अयोध्या में हर दिन 2 लाख से ज्यादा श्रद्धालु आ रहे हैं, और त्योहारों पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में मंदिर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीक के साथ-साथ एक बेहतरीन 'मंदिर मैनेजमेंट सिस्टम' स्थापित करना बेहद जरूरी हो गया है।
हालिया दान विवादों को देखते हुए सर्च कमेटी ने साफ किया है कि जनता यह उम्मीद करती है कि मंदिर में आने वाले एक-एक पैसे का सही हिसाब रखा जाए। हावरे के मुताबिक, पैसे को सिर्फ बैंक खातों में जमा रखना सही प्रबंधन नहीं है। उस पैसे को सही जगह निवेश किया जाना चाहिए और समाज सेवा के कार्यों में लगाना चाहिए। आज के समय में मंदिरों से यह उम्मीद की जाती है कि वे अस्पताल, स्कूल, वृद्धाश्रम और मुफ्त भोजन (अन्नदान) जैसी सामाजिक पहलों को चलाएं। इसलिए, वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शिता इस प्रशासन का सबसे अभिन्न हिस्सा होंगे। कमेटी एक ऐसे व्यक्ति की तलाश में है जो अपनी पेशेवर कुशलता और सच्ची भक्ति के बल पर करोड़ों लोगों की आस्था के अनुरूप एक पारदर्शी और मजबूत संस्था का निर्माण कर सके।
Location : Ayodhya
Published : 10 July 2026, 11:10 AM IST