क्या CBI करेगी राम मंदिर गबन कांड की जांच? हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में सोमवार को सुनवाई

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सोमवार को हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ बड़ा फैसला सुना सकती है। अधिवक्ता मोहित अशोक की PIL में गबन के आरोपों की CBI जांच और मंदिर के नकद, सोने-चांदी के चढ़ावे का CAG से ऑडिट कराने की मांग की गई है, जिससे रामभक्तों की नजर सुनवाई पर टिकी हुई है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 4 July 2026, 11:47 AM IST

Ayodhya: अयोध्या के भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर चोरी विवाद मामले में एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने देश भर के करोड़ों रामभक्तों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मंदिर के दानपात्रों से चढ़ावा चोरी और कथित गबन के आरोपों को लेकर अब कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। क्या इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) को सौंपी जाएगी? इस बेहद संवेदनशील सवाल पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ सोमवार को अपना रुख साफ कर सकती है।

ठंडे बस्ते से निकलकर कोर्ट रूम तक पहुंचा मामला

इस पूरे मामले को लेकर हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। दरअसल, यह याचिका बीते 12 जून को ही कोर्ट में पेश कर दी गई थी, लेकिन कोर्ट में ग्रीष्मकालीन अवकाश (समर वेकेशन) होने और समय की कमी के कारण इस पर तुरंत सुनवाई नहीं हो सकी थी।

अब, छुट्टियों के बाद कोर्ट खुलते ही इस मामले ने रफ्तार पकड़ ली है। 6 जुलाई की वाद सूची (कॉज लिस्ट) में इस जनहित याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। सोमवार को न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की जोरदार सुनवाई होने की पूरी संभावना है।

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जनहित याचिका में क्या हैं बड़ी मांगें?

यह जनहित याचिका स्थानीय अधिवक्ता मोहित अशोक द्वारा व्यक्तिगत रूप से दाखिल की गई है। याचिका में सिर्फ जांच ही नहीं, बल्कि पारदर्शिता को लेकर कई बड़ी मांगें कोर्ट के सामने रखी गई हैं-

CBI जांच की मांग: कथित गबन और चोरी के इस संवेदनशील मामले में केस दर्ज कर इसकी कमान सीधे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है।

CAG से ऑडिट की गुहार: मंदिर के दानपात्रों में भक्तों द्वारा चढ़ाए जाने वाले भारी-भरकम कैश (नकद धनराशि), सोने-चांदी के आभूषणों और अन्य सभी कीमती उपहारों का पूरा ऑडिट भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) से कराने की मांग की गई है।

SP स्तर के अधिकारी की निगरानी: याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार को यह निर्देश देने की भी मांग की है कि मामले की तफ्तीश कम से कम पुलिस अधीक्षक (SP) स्तर के किसी वरिष्ठ अधिकारी की देखरेख में ही कराई जाए।

करोड़ों भक्तों की आस्था का सवाल...

याचिकाकर्ता मोहित अशोक का कहना है कि भगवान श्रीराम का मंदिर दुनिया भर के करोड़ों हिंदुओं की अटूट आस्था और श्रद्धा का सबसे बड़ा केंद्र है। ऐसे पावन स्थान पर दान और चढ़ावे की संपत्ति के कथित गबन के आरोप लगातार अखबारों की सुर्खियां बन रहे हैं। इन खबरों से देश-विदेश के रामभक्तों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि भक्तों का भरोसा बनाए रखने के लिए इस पूरे प्रकरण की एक निष्पक्ष और पारदर्शी जांच और ऑडिट होना बेहद जरूरी है।

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केंद्र, राज्य और ट्रस्ट समेत कई बड़े नाम बने पक्षकार

मामले की गंभीरता को देखते हुए इस याचिका में कई रसूखदार विभागों और संस्थाओं को लपेटे में लिया गया है। याचिका में मुख्य रूप से-

  • केंद्र सरकार
  • राज्य सरकार के सतर्कता विभाग (विजिलेंस) के प्रमुख सचिव
  • सीबीआई (CBI) के निदेशक
  • कैग (CAG)
  • श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (चेयरपर्सन के माध्यम से)

इन सभी को इस कानूनी लड़ाई में पक्षकार (रेस्पोंडेंट) बनाया गया है। अब पूरे देश की नजरें सोमवार को होने वाली हाई कोर्ट की इस सुनवाई पर टिकी हैं कि कोर्ट इस पर क्या कड़ा रुख अपनाता है।

Location :  Ayodhya

Published :  4 July 2026, 11:47 AM IST