
प्रतीकात्मक छवि (Image Source: Pinterest)
Prayagraj: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कम अवधि तक चली शादी से जुड़े दहेज उत्पीड़न, मारपीट और गला घोंटने के प्रयास के आरोपों वाली FIR रद्द कर दी है। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि वैवाहिक विवादों को आपराधिक मुकदमों में बदलना खतरनाक है। हर टूटी या संकटग्रस्त शादी को FIR में बदलकर आपराधिक कानून के दायरे में लाने से विवाह जैसी संस्था की बुनियाद प्रभावित हो सकती है।
जस्टिस चंद्रधारी सिंह और जस्टिस तरुण सक्सेना की डिवीजन बेंच ने गौरव जैन और उनके परिवार की याचिका स्वीकार करते हुए आगरा के हरि पर्वत थाने में दर्ज मामले को रद्द कर दिया। यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और दहेज निषेध अधिनियम, 1961 की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज की गई थी।
मामले के अनुसार, दंपती की शादी 12 नवंबर, 2024 को हुई थी। पत्नी करीब ढाई महीने ससुराल में रहने के बाद 3 फरवरी, 2025 को वहां से चली गई। इसके बाद पति ने 3 मई, 2025 को तलाक की अर्जी दाखिल की। वहीं, पत्नी ने 30 जून, 2025 को पति और उसके परिवार के खिलाफ FIR दर्ज कराई।
FIR में 10 करोड़ रुपये और 50 लाख रुपये की मांग करने, प्रताड़ित करने, खाना नहीं देने, धमकाने, स्त्रीधन हड़पने और गला घोंटने की कोशिश जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। अदालत ने इन आरोपों का परीक्षण करते हुए शादी की कम अवधि और मामले की परिस्थितियों पर गौर किया।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पति-पत्नी के साथ रहने की अवधि के दौरान कथित मारपीट या प्रताड़ना को लेकर घरेलू हिंसा की कोई शिकायत दर्ज होने का रिकॉर्ड सामने नहीं आया। इसके अलावा, न तो किसी पीसीआर कॉल और न ही पुलिस हस्तक्षेप का कोई रिकॉर्ड अदालत के सामने प्रस्तुत किया गया।
अदालत ने इन परिस्थितियों को आरोपों के मूल्यांकन में महत्वपूर्ण माना। पीठ ने आगाह किया कि केवल सामान्य आरोपों के आधार पर आपराधिक कार्यवाही जारी रखना उचित नहीं है।
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अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि FIR में कथित दहेज की रकम का सटीक उल्लेख होना अपने आप में आरोपों की सत्यता साबित नहीं करता। पीठ के अनुसार, रकम की सटीकता को कथित घटना या संबंधित आचरण की सटीकता नहीं माना जा सकता।
हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवादों में आपराधिक कानून के दुरुपयोग के प्रति चेतावनी देते हुए कहा कि कम अवधि की शादी से जुड़े मामलों में सामान्य और मनगढ़ंत आरोपों के आधार पर आपराधिक कार्यवाही जारी नहीं रहनी चाहिए। इसी आधार पर अदालत ने संबंधित FIR रद्द कर दी।
Location : Prayagraj
Published : 11 October 2026, 2:44 PM IST