
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Img : Google)
Lucknow : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ के जिलाधिकारी (DM) और अतिरिक्त जिलाधिकारी (न्यायिक) (ADM Judicial) पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने कहा कि इन अधिकारियों ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर एक जमीन से जुड़े मामले में कार्रवाई की। जिससे एक व्यक्ति को अपने हक की रक्षा के लिए हाईकोर्ट जाना पड़ा।
यह मामला जमीन विवाद से जुड़ा है। एक वकील ने शिकायत की थी कि एक जमीन पर अवैध निर्माण और गलत गतिविधियां हो रही हैं। इस शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी, जबकि शिकायतकर्ता का उस जमीन से सीधा कोई लेना-देना नहीं था।
वकील ने पहले जमीन मालिक को एक पत्र लिखा था और आरोप लगाया था कि जमीन गलत तरीके से खरीदी गई है और उस पर अवैध काम हो रहा है। जब जमीन मालिक ने जवाब नहीं दिया तो वकील ने जिलाधिकारी के पास शिकायत कर दी।
इसके बाद जिलाधिकारी ने मामला ADM (न्यायिक) को भेज दिया। ADM ने आदेश जारी कर दिया कि जमीन मालिक न तो जमीन बेच सकता है और न ही उस पर निर्माण कर सकता है।
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जस्टिस पंकज भाटिया की बेंच ने इस मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारियों ने बिना अधिकार क्षेत्र देखे ही कार्रवाई कर दी। कोर्ट ने कहा कि जमीन मालिक का नाम पहले से ही राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज था फिर भी उसके अधिकारों में दखल दिया गया, जो गलत है। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसी प्रक्रिया में पहले लेखपाल की रिपोर्ट और तहसील स्तर पर जांच होनी चाहिए थी लेकिन यहां सीधे जिलाधिकारी ने शिकायत स्वीकार कर ली। यह नियमों के खिलाफ है।
हाईकोर्ट ने DM, ADM (न्यायिक) और शिकायतकर्ता तीनों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने कहा कि यह जुर्माना इसलिए लगाया गया क्योंकि गलत कार्रवाई की वजह से व्यक्ति को हाईकोर्ट आकर अपने अधिकार बचाने पड़े।
कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी अपनी सीमा से बाहर जाकर लोगों के जमीन संबंधी अधिकारों में दखल नहीं दे सकते। अगर ऐसा होता है तो आम लोगों को बेवजह कोर्ट का सहारा लेना पड़ता है। यह गलत है।
Location : Lucknow
Published : 23 May 2026, 6:32 PM IST