₹300 की रिश्वत, 49 साल का इंतजार और अब जेल, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लेखपाल को दिया बड़ा झटका

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 49 साल पुराने रिश्वतखोरी के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए एक लेखपाल की एक साल की कठोर कैद की सजा को बरकरार रखा है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 49 साल पुराने रिश्वतखोरी के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए एक लेखपाल की एक साल की कठोर कैद की सजा को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 7 July 2026, 4:24 PM IST

Allahabad: उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाई कोर्ट ने करीब 49 साल पुराने रिश्वतखोरी के मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने एक लेखपाल को सुनाई गई एक साल की कठोर कैद की सजा को बरकरार रखते हुए उसकी 41 साल पुरानी आपराधिक अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने आरोपी को चार सप्ताह के भीतर संबंधित ट्रायल कोर्ट में सरेंडर कर बची हुई सजा पूरी करने का निर्देश दिया है। यह फैसला न्यायमूर्ति संजीव कुमार की एकल पीठ ने सुनाया।

1977 में विजिलेंस ने रंगे हाथों पकड़ा था

अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी महेश चंद कानपुर की एक तहसील में लेखपाल के पद पर तैनात था। उस पर आरोप था कि उसने जमीन विवाद से जुड़े एक मामले में मदद करने के बदले 400 रुपये की रिश्वत मांगी थी। शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस विभाग ने ट्रैप की योजना बनाई। शिकायतकर्ता को फिनॉलफ्थेलीन पाउडर लगे 100-100 रुपये के तीन नोट दिए गए। जैसे ही आरोपी ने 300 रुपये लेकर अपनी जेब में रखे, विजिलेंस टीम ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया।

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1985 में हुई थी सजा

ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 1985 में महेश चंद को दोषी मानते हुए एक साल की कठोर कैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद आरोपी ने हाई कोर्ट में अपील दायर की, जो कई दशकों तक लंबित रही। अब अदालत ने सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही माना है।

बचाव पक्ष की दलीलें कोर्ट ने कीं खारिज

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कहा कि शिकायतकर्ता की अदालत में गवाही नहीं हुई, इसलिए अभियोजन का मामला कमजोर है। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर रिश्वत नहीं लेता, इसलिए ट्रैप की कहानी पर संदेह होना चाहिए।

Location :  Allahabad

Published :  7 July 2026, 4:24 PM IST