Allahabad HC: गवाहों के बयान में नहीं चलेगी मनमानी! ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग पर कोर्ट का बड़ा निर्देश

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी से BNSS की धारा 180 के तहत गवाहों के बयानों की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग सभी आपराधिक मामलों में अनिवार्य करने पर विचार करने को कहा है। कोर्ट ने E-Sakshya App के इस्तेमाल और जांच में पारदर्शिता व निष्पक्षता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 18 September 2026, 8:30 AM IST

Allahabad:  इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आपराधिक मामलों की जांच में गवाहों के बयानों की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर अहम निर्देश दिया है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 180 के तहत दर्ज किए जाने वाले बयानों की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को सभी मामलों में अनिवार्य बनाने पर विचार करने को कहा है। कोर्ट के मुताबिक, इससे पुलिस जांच में पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ सकती है और अदालतों को जमानत समेत अन्य न्यायिक कार्यवाही में मदद मिलेगी।

दहेज मामले की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान टिप्पणी

यह निर्देश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने आगरा के एक दहेज से जुड़े मामले में चंद्रकांता की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी ने स्वीकार किया कि पहली सूचना देने वाले व्यक्ति का बयान BNSS की धारा 180 के तहत दर्ज करते समय उसका ऑडियो-वीडियो रिकॉर्ड तैयार नहीं किया गया था। इस पर कोर्ट ने मामले में रिकॉर्डिंग की जरूरत और जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं।

अभी सभी मामलों में रिकॉर्डिंग अनिवार्य नहीं

BNSS की धारा 180(3) जांच अधिकारी को गवाह के बयान को ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से रिकॉर्ड करने की अनुमति देती है। कोर्ट ने बताया कि उत्तर प्रदेश के डीजीपी ने जुलाई 2025 में दुष्कर्म पीड़िताओं के बयानों की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य की थी, जबकि दूसरे मामलों में यह व्यवस्था वैकल्पिक थी। हाई कोर्ट ने कहा कि इस विकल्प का कई मामलों में उचित तरीके से इस्तेमाल नहीं हो रहा है।

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E-Sakshya App से रिकॉर्डिंग की सलाह

कोर्ट ने जांच अधिकारियों को निर्देश दिया कि संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर वे जल्द से जल्द घटनास्थल पर पहुंचकर प्रथम सूचनाकर्ता और अन्य गवाहों के बयान दर्ज करें। बयानों की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए प्राथमिकता के आधार पर E-Sakshya App का इस्तेमाल करने की बात कही गई है। रिकॉर्डिंग को जरूरत पड़ने पर संबंधित अदालत के सामने उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

जांच में निष्पक्षता पर कोर्ट का जोर

हाई कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी का उद्देश्य वास्तविक घटना और आरोपी की भूमिका से जुड़े तथ्य सामने लाना होना चाहिए। कोर्ट ने स्वतंत्र गवाहों के बयान दर्ज करने पर भी जोर दिया। इसके अलावा दुष्कर्म और यौन अपराध के मामलों में पीड़िता की सुविधा के अनुसार बयान दर्ज करने समेत जांच से जुड़े कई अन्य दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं।

कोर्ट ने डीजीपी से इन दिशा-निर्देशों को सभी जांच अधिकारियों तक पहुंचाने को कहा है। हालांकि, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को सभी मामलों में अनिवार्य करने का अंतिम निर्णय अभी डीजीपी स्तर पर विचार के बाद लिया जाना है।

Location :  Allahabad

Published :  18 September 2026, 8:30 AM IST