आगरा पनवारी कांड में 34 साल बाद आया ऐतिहासिक फैसला: 36 दोषी करार और 15 बरी, राजीव गांधी तक आए थे पीड़ित से मिलने

इस कांड ने दिल्ली की राजनीति को भी हिलाकर रख दिया था। इस कांड में शामिल 27 लोगों की मौत भी हो चुकी हैं। पढ़िए डाइनामाइट न्यूज़ की खास खबर

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 28 May 2025, 8:37 PM IST

आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के बहुचर्चित पनवारी कांड में आखिरकार 34 साल बाद न्यायालय का ऐतिहासिक निर्णय सामने आया है। मंगलवार को एससी-एसटी विशेष अदालत ने इस भयावह जातीय हिंसा के मामले में 36 आरोपियों को दोषी ठहराया है और 15 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। तीन आरोपी अब भी फरार हैं और उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए हैं। अदालत अब 30 मई को दोषियों को सजा सुनाएगी।

डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, यह मामला 21 जून 1990 का है। जब आगरा के सिकंदरा थाना क्षेत्र के पनवारी गांव में जाटव समाज की एक बेटी मुंद्रा की बारात पहुंची थी। बारात नगला पद्मा से आई थी, जाट समुदाय के लोगों ने बारात को अपने घर के सामने से गुजरने से रोक दिया। इस बात को लेकर भारी विवाद हुआ और विवाद देखते ही देखते दंगे में तब्दील हो गया।

एक व्यक्ति की मौत

गांव में मारपीट, आगजनी और लूटपाट शुरू हो गई। कई घर जलाकर राख कर दिए गए। हालात इस कदर बिगड़े कि पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी। जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई। पूरा आगरा हिंसा की चपेट में आ गया और शहर में कर्फ्यू लगाना पड़ा।

पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे थे राजीव गांधी

इस जातीय हिंसा की गूंज दिल्ली तक पहुंची थी। तत्कालीन विपक्ष के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी खुद पीड़ितों से मिलने आगरा पहुंचे थे। उनके साथ तत्कालीन केंद्रीय मंत्री और आगरा के सांसद अजय सिंह भी मौजूद थे, जिन्होंने दोनों पक्षों से बातचीत कर हालात को शांत करने की कोशिश की थी।

80 लोगों के खिलाफ चार्जशीट, 27 की हो चुकी है मौत

घटना के बाद 22 जून 1990 को तत्कालीन थानाध्यक्ष ओमवीर सिंह राणा ने राहगीर की सूचना पर 6000 अज्ञात लोगों के खिलाफ बलवा, जानलेवा हमला, आगजनी, लूटपाट और एससी/एसटी एक्ट समेत कई गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी। जांच के बाद कुल 80 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। इनमें से 27 आरोपियों की अब तक मृत्यु हो चुकी है और तीन आरोपी अब भी फरार हैं।

भाजपा विधायक चौधरी बाबूलाल भी आरोपी बनाया

इस मामले में भाजपा विधायक चौधरी बाबूलाल भी आरोपी बनाए गए थे, लेकिन उन्हें वर्ष 2022 में एमपी-एमएलए कोर्ट से बरी कर दिया गया था। बाकी आरोपियों पर सुनवाई एससी-एसटी विशेष अदालत में चली। कोर्ट ने कुल 35 गवाहों के बयान दर्ज किए और सबूतों के आधार पर 36 लोगों को दोषी ठहराया है।

इन धाराओं में हुआ मुकदमा दर्ज

इन आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धाराएं 148 (दंगा), 149 (सामूहिक अपराध), 323 (मारपीट), 325 (गंभीर चोट), 452 (घर में घुसकर हमला), 436 (आगजनी), 427 (नुकसान पहुंचाना), 504 (उकसावे की भाषा), 395 (डकैती) और SC/ST एक्ट की धारा 3/2/5 के तहत आरोप तय हुए थे।

क्या बोले सरकारी वकील?

जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) बसंत गुप्ता ने कहा, “यह घटना 24 जून 1990 की दोपहर की है। अकोला गांव में जाटव समाज के साथ लूटपाट और मारपीट की गई थी। मुकदमा ओमपाल राणा की ओर से दर्ज कराया गया था। जांच के बाद 72 लोगों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई। अब 35 आरोपियों को कोर्ट ने दोषी माना है, जबकि 15 को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है। 30 मई को खुले अदालत में सजा का ऐलान किया जाएगा।”

Location :  Agra

Published :  28 May 2025, 5:42 PM IST