Abbas-Nikhat Case: जेल में ‘सीक्रेट मुलाकात’ कांड पर बड़ा मोड़, क्या बरी हो जाएंगे निलंबित जेल अधीक्षक?

चित्रकूट जेल में हुई कथित ‘वीआईपी मुलाकात’ मामले ने अब नया कानूनी मोड़ ले लिया है। अदालत में हुई बहस के दौरान ऐसे तर्क सामने आए, जिन्होंने पूरे केस को फिर सुर्खियों में ला दिया। क्या निलंबित जेल अधीक्षक को राहत मिलेगी या बढ़ेंगी मुश्किलें?

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 14 May 2026, 2:18 PM IST

Banda: चित्रकूट जेल में विधायक अब्बास अंसारी और उनकी पत्नी निकहत अंसारी की कथित नियम विरुद्ध मुलाकात के मामले में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। बांदा स्थित भ्रष्टाचार निवारण अदालत में बुधवार को निलंबित जेल अधीक्षक संतोष कुमार सागर की ओर से दाखिल डिस्चार्ज प्रार्थना पत्र पर लंबी बहस हुई। हालांकि बहस पूरी न हो पाने के कारण अदालत ने अगली सुनवाई 23 मई तय की है।

इस बीच अब्बास अंसारी और उनकी पत्नी निकहत ने अदालत में हाजिरी माफी का प्रार्थना पत्र भी दाखिल किया, जिसे लेकर राजनीतिक और कानूनी गलियारों में चर्चाएं तेज हैं।

कब सामने आया पूरा मामला?

यह मामला पहली बार 10 फरवरी 2023 को चर्चा में आया था, जब चित्रकूट जेल में जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने संयुक्त छापा मारा था। छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने निकहत अंसारी को जेल अधीक्षक के कमरे में पाया था। आरोप था कि वह लंबे समय से वहां मौजूद थीं और यह मुलाकात जेल नियमों के पूरी तरह खिलाफ थी। बताया गया कि तलाशी अभियान के दौरान निकहत करीब 10 घंटे बाद जेल अधीक्षक के कमरे से बाहर आई थीं। इस खुलासे के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और वीआईपी सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।

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आठ लोगों के खिलाफ दर्ज हुई थी एफआईआर

मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्वी कोतवाली में कुल आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।  जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया था कि जेल के भीतर नियमों को दरकिनार कर विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही थीं।

एसआईटी जांच में हुए थे कई बड़े खुलासे

मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले दावे किए थे। जांच में सामने आया था कि जेल अधिकारियों को कथित तौर पर पैसे और महंगे उपहार देकर अब्बास अंसारी से विशेष मुलाकात कराई जाती थी।

एसआईटी की रिपोर्ट के बाद मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया था। विपक्षी दलों ने इसे सत्ता और रसूख के दुरुपयोग का उदाहरण बताया था, जबकि बचाव पक्ष लगातार आरोपों को राजनीतिक साजिश करार देता रहा।

कोर्ट में क्या हुई बहस?

बुधवार को बांदा की भ्रष्टाचार निवारण अदालत में निलंबित जेल अधीक्षक संतोष कुमार सागर के अधिवक्ता ने डिस्चार्ज प्रार्थना पत्र पर जोरदार दलीलें पेश कीं। बचाव पक्ष का कहना था कि उनके मुवक्किल को बिना पर्याप्त आधार के मामले में फंसाया गया है और उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं हैं।

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वहीं, अपर लोक अभियोजक और सरकारी अधिवक्ता ने इसका विरोध करते हुए अदालत को बताया कि चार्जशीट में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं, जो आरोपों की पुष्टि करते हैं। अभियोजन पक्ष ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों को राहत देना उचित नहीं होगा।

23 मई को हो सकता है बड़ा फैसला

अब इस बहुचर्चित मामले की अगली सुनवाई 23 मई को होगी। उसी दिन अदालत में अंतिम बहस पूरी होने की संभावना है। इसके बाद यह तय किया जाएगा कि निलंबित जेल अधीक्षक संतोष कुमार सागर को मामले से बरी किया जाएगा या उनके खिलाफ मुकदमा आगे चलेगा।

Location :  Banda

Published :  14 May 2026, 2:18 PM IST