‘पानी सिर्फ नल तक पहुंचाना काफी नहीं, इसे बचाना भी होगा’, मिर्जापुर में बच्चों ने दिया बड़ा संदेश, गांवों में जल सुरक्षा पर जोर

मिर्जापुर में आयोजित ‘जल अर्पण’ कार्यक्रम में बच्चों ने अपनी प्रस्तुति के जरिए पानी के भविष्य को लेकर ऐसा संदेश दिया, जिसने सभी का ध्यान खींचा। जल वंदना के बाद जलापूर्ति योजना समुदाय को सौंपी गई और ‘जल बिना भविष्य’ नाटक ने पानी बचाने की जरूरत समझाई।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 16 September 2026, 11:57 AM IST

Mirzapur: गांवों तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाने की कोशिशों के बीच मिर्जापुर में आयोजित ‘जल अर्पण’ कार्यक्रम ने जल संरक्षण को लेकर एक अहम संदेश दिया। कार्यक्रम में बच्चों की प्रार्थना से लेकर जल संरक्षण पर आधारित नाटक और सामूहिक जल शपथ तक कई गतिविधियां हुईं।

इस दौरान जलापूर्ति योजना को औपचारिक रूप से समुदाय को सौंपा गया। कार्यक्रम में अधिकारियों और ग्रामीण स्तर की संस्थाओं ने पानी की उपलब्धता के साथ उसके सही इस्तेमाल और रखरखाव पर भी जोर दिया।

बच्चों ने ‘जल बिना भविष्य’ से समझाया पानी का महत्व

कार्यक्रम की शुरुआत बच्चों की ओर से ‘जल वंदना’ से हुई। इसके बाद ‘जल शृंगार’ का आयोजन किया गया, जिसके माध्यम से जलापूर्ति योजना को औपचारिक रूप से समुदाय को सौंपने की प्रक्रिया पूरी हुई।कार्यक्रम का सबसे खास हिस्सा बच्चों की ओर से प्रस्तुत लघु नाटिका रही। ‘A Future without Water’ यानी ‘जल बिना भविष्य’ विषय पर बच्चों ने नाटक के जरिए यह दिखाने की कोशिश की कि अगर पानी को बचाने की आदत नहीं अपनाई गई तो आने वाले समय में लोगों के सामने किस तरह की परेशानियां खड़ी हो सकती हैं।

नाटक के बाद कार्यक्रम का समापन सामूहिक ‘जल शपथ’ के साथ हुआ। इसमें मौजूद लोगों ने पानी को बचाने और उसका जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल करने की साझा जिम्मेदारी दोहराई।

ये भी पढ़ें- न्यायालय में मामला चल रहा है, फिर भी शुरू करा दी सड़क! सासनी में निजी जमीन पर इंटरलॉकिंग को लेकर घमासान

गांव की जल व्यवस्था में समिति की अहम भूमिका

ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (VWSC) की सदस्य अमृता ने योजना के संचालन और प्रबंधन में समुदाय की भूमिका के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ग्रामीण इलाकों में जल सेवाओं को लगातार और लंबे समय तक बेहतर बनाए रखने में स्थानीय संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने समिति की जिम्मेदारियों पर भी जोर दिया। कार्यक्रम में यह संदेश सामने आया कि केवल पाइपलाइन, टंकी या नल लग जाने से गांव में जल व्यवस्था पूरी तरह मजबूत नहीं होती। इसके लिए स्थानीय लोगों की भागीदारी, योजनाओं का रखरखाव, जागरूकता और पानी का सही इस्तेमाल भी जरूरी है।

महिलाओं की भागीदारी पर भी दिया गया जोर

कार्यक्रम में ग्रामीण जल व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया गया। अधिकारियों और आयोजकों की ओर से कहा गया कि गांवों में पानी से जुड़े कामकाज और योजनाओं को लंबे समय तक चलाने में महिलाओं और स्थानीय संस्थाओं की सक्रिय भूमिका जरूरी है।

‘जल अर्पण’ कार्यक्रम के जरिए समुदाय के स्वामित्व की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया गया। यानी जलापूर्ति योजना केवल सरकारी व्यवस्था न रहकर गांव के लोगों की भी जिम्मेदारी बने और लोग इसके संचालन, रखरखाव और पानी के जिम्मेदार इस्तेमाल में भागीदार बनें।

मिर्जापुर की भौगोलिक स्थिति बड़ी चुनौती

कार्यक्रम में अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) ने मिर्जापुर की भौगोलिक परिस्थितियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिले का ऊबड़-खाबड़ और दुर्गम इलाका जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विशेष चुनौती पेश करता है। उन्होंने यूएनओपीएस और उसकी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि अब जिले के अधिकांश हिस्सों में पानी की उपलब्धता और पहुंच में सुधार हुआ है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर जल पहुंच सुनिश्चित करने में लगातार किए जा रहे सहयोग के लिए आभार जताया।

ये भी पढ़ें- अब दिल्ली के लोग प्यास बुझाने के लिए नहीं तरसेंगे, छह राज्यों में समझौते से हर दिन 80 मिलियन गैलन पानी मिलेगा!

478 गांवों तक पहुंचाने का लक्ष्य

भारत और डेनमार्क सरकारों के बीच Green Strategic Partnership के तहत यूएनओपीएस, जल जीवन मिशन को उत्तर प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु और असम के कुल 478 गांवों में सुरक्षित पेयजल पहुंचाने में सहयोग कर रहा है।

उत्तर प्रदेश में 2021 में शुरू हुई इस पहल का 2026 तक 11 जिलों के 200 से अधिक गांवों तक विस्तार होने की जानकारी दी गई। अक्टूबर 2022 में परियोजना के दूसरे चरण की शुरुआत के बाद समुदायों को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

Location :  Mirzapur

Published :  16 September 2026, 11:57 AM IST