मुंबई में थमे ऑटो-टैक्सी के पहिए, ड्राइवरों का दर्द में कहा- 60 की उम्र में कैसे सीखें मराठी?

मुंबई में ऑटो-टैक्सी चालक मराठी भाषा अनिवार्य करने के सरकारी आदेश के विरोध में तीन दिन की हड़ताल पर हैं। ड्राइवरों का कहना है कि 55-60 साल की उम्र में नई भाषा सीखना मुश्किल है और जुर्माने से उनकी रोजी-रोटी पर संकट आ गया है।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 24 August 2026, 4:14 PM IST

Mumbai: मुंबई में सोमवार से ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों की तीन दिवसीय हड़ताल शुरू हो गई है। शहर की सड़कों पर यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऑटो और टैक्सी ड्राइवर महाराष्ट्र सरकार के उस आदेश का विरोध कर रहे हैं, जिसमें ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा का बुनियादी ज्ञान अनिवार्य किया गया है। ड्राइवरों का कहना है कि उम्र के इस पड़ाव पर अचानक नई भाषा सीखना उनके लिए बेहद मुश्किल है। उनका आरोप है कि नियम लागू होने के बाद जुर्माने का डर दिखाकर उन्हें परेशान किया जा रहा है।

'60 साल की उम्र में कैसे सीखें मराठी?'

हड़ताल पर बैठे एक ऑटो चालक ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा, "हम 60 साल के हो चुके हैं। इस उम्र में अचानक मराठी बोलना सीखना आसान नहीं है। हम न्याय चाहते हैं।" वहीं दूसरे ड्राइवरों का कहना है कि कई चालक 55 से 60 साल की उम्र के हैं और उन्होंने कभी स्कूल तक नहीं देखा। ऐसे में उनसे तुरंत भाषा सीखने की उम्मीद करना सही नहीं है।ड्राइवरों का कहना है कि वे टूटी-फूटी मराठी बोलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन पर जुर्माना लगाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि 15 से 20 हजार रुपये तक का जुर्माना गरीब ड्राइवर कैसे भर सकते हैं।

सरकार का तर्क- यात्रियों से बेहतर संवाद के लिए जरूरी

महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि मुंबई और आसपास के इलाकों में काम करने वाले ऑटो, टैक्सी और कैब चालकों को स्थानीय भाषा की जानकारी होनी चाहिए, ताकि यात्रियों के साथ संवाद बेहतर हो सके।सरकार का दावा है कि पहले भी परमिट के लिए मराठी भाषा का ज्ञान एक शर्त थी, लेकिन इसका सख्ती से पालन नहीं हो रहा था। अब इसे प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है और नियम तोड़ने वालों पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है। यही नियम अब ड्राइवरों और सरकार के बीच विवाद की मुख्य वजह बन गया है।

ड्राइवरों के समर्थन में आए नेता

इस मामले में शिवसेना नेता संजय निरुपम ने भी ड्राइवरों की समस्याओं को लेकर आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए पर्याप्त समय दिया था और बड़ी संख्या में चालकों ने भाषा का बुनियादी ज्ञान हासिल भी कर लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ आरटीओ अधिकारी नियमों के नाम पर ऑटो चालकों को परेशान कर रहे हैं। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर मंत्री प्रताप सरनाईक से मुलाकात की और कार्रवाई की मांग की।

लाखों यात्रियों पर पड़ा हड़ताल का असर

ऑटो और टैक्सी सेवा बंद होने से मुंबई में लाखों यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। ऑफिस जाने वाले लोगों, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हड़ताल के कारण लोकल ट्रेनों और बसों में भी अतिरिक्त भीड़ देखने को मिल रही है। ड्राइवर यूनियनों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर समाधान नहीं निकलेगा और कथित उत्पीड़न बंद नहीं होगा, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।

Location :  Mumbai

Published :  24 August 2026, 4:14 PM IST