आजकल स्मार्टफोन में एआई फीचर्स बढ़ रहे हैं, लेकिन ये बैटरी तेजी से खत्म कर देते हैं। कई फीचर्स डिवाइस पर चलते हैं और रैम पर ज्यादा लोड डालते हैं। जेमिनी नैनो जैसे ऑन-डिवाइस AI मॉडल्स भी बैटरी खर्च बढ़ाते हैं।
बेकार फीचर्स डिसेबल करने से बैटरी बचती है और फोन तेज चलता है।

फोन बैटरी
New Delhi: आजकल स्मार्टफोन कंपनियां अपने डिवाइस में एक से बढ़कर एक एआई फीचर्स जोड़ने की होड़ में लगी हैं। भले ही सभी यूजर्स इन फीचर्स का पूरा इस्तेमाल न करते हों, लेकिन लगभग हर नया फोन अब एआई-पावर्ड” बन चुका है। इन एडवांस फीचर्स का असर सिर्फ परफॉर्मेंस तक सीमित नहीं है। इसकी कीमत फोन की बैटरी लाइफ को भी चुकानी पड़ रही है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि एआई फीचर्स बैटरी को कैसे प्रभावित करते हैं और इससे बचने के उपाय क्या हैं।
आज के स्मार्टफोन में कई एआई प्रोसेस क्लाउड पर नहीं, सीधे डिवाइस पर ही चलते हैं। इसके लिए फोन के प्रोसेसर में न्यूरल प्रोसेसिंग यूनिट (NPU) दी जाती है। यह स्पीच रिकग्निशन, फोटो एन्हांसमेंट, लाइव ट्रांसलेशन और स्मार्ट सजेशन जैसे काम संभालती है। ये फीचर्स अक्सर बैकग्राउंड में लगातार एक्टिव रहते हैं, जिससे बैटरी की खपत बढ़ जाती है।
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ऑन-डिवाइस एआई मॉडल्स, जैसे जेमिनी नैनो, तेज काम करने के लिए अपने डेटा का बड़ा हिस्सा रैम में लोड रखते हैं। इससे प्रोसेसिंग तेज होती है लेकिन रैम पर दबाव बढ़ जाता है। नतीजतन, फोन कुछ ऐप्स को बंद कर देता है। जब यूजर उन्हें दोबारा खोलता है तो ज्यादा बैटरी खर्च होती है और डिवाइस की परफॉर्मेंस पर असर पड़ता है।
अगर आप एआई फीचर्स का ज्यादा इस्तेमाल नहीं करते हैं तो इन्हें बंद करना एक आसान उपाय है। आप नाउ प्लेइंग, लाइव ट्रांसलेशन, एआई वॉलपेपर, स्मार्ट रिप्लाई और स्क्रीन कॉन्टेक्स्ट एनालिसिस जैसे फीचर्स को डिसेबल कर सकते हैं। इससे बैटरी लाइफ बेहतर होगी और फोन की स्पीड भी बढ़ेगी।
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एआई फीचर्स निश्चित रूप से उपयोगी हैं लेकिन हर फीचर को हर समय चालू रखना जरूरी नहीं है। जरूरत के अनुसार इनका इस्तेमाल करने से आप अपने फोन की बैटरी और परफॉर्मेंस दोनों को संतुलित रख सकते हैं।