
Telegram बैन पर Pavel Durov का बयान प्रतीकात्मक छवि (फोटो सोर्स- Pinterest)
New Delhi: मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम को लेकर भारत में बड़ा विवाद सामने आया है। NEET-UG 2026 री-एग्जामिनेशन से पहले कथित रूप से परीक्षा से जुड़े फर्जी मैसेज, चीटिंग और लीक कंटेंट को रोकने के लिए सरकार ने प्लेटफॉर्म पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया। इस कार्रवाई को लेकर टेलीग्राम के संस्थापक पावेल दुरोव ने भारत सरकार की आलोचना की है और इसे 15 करोड़ से अधिक भारतीय यूजर्स के लिए ‘सजा’ बताया है।
सरकारी जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने 16 जून 2026 को टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया है, जो 22 जून 2026 तक लागू रहेगा। यह कदम 21 जून को होने वाली NEET-UG 2026 री-एग्जामिनेशन और उसके आसपास के समय को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। यह कार्रवाई नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की सिफारिशों के आधार पर की गई है।
इसके तहत Google ने अपने Play Store से ऐप को हटा दिया है, जबकि Apple द्वारा भी जल्द इसी तरह की कार्रवाई की संभावना जताई गई है।
टेलीग्राम के फाउंडर पावेल दुरोव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत सरकार ने केवल कुछ यूजर्स द्वारा परीक्षा से जुड़े लीक मैटेरियल साझा करने के कारण पूरे प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई की है। उन्होंने दावा किया कि इससे लाखों सामान्य उपयोगकर्ताओं को नुकसान हुआ है।
दुरोव ने यह भी कहा कि इस तरह के प्रतिबंध से वास्तविक समस्या का समाधान नहीं हुआ है, क्योंकि लीक की सामग्री अन्य एप्स पर भी फैल गई है। उनके अनुसार, “इससे केवल आम यूजर्स प्रभावित हुए हैं, न कि वे लोग जो लीक के लिए जिम्मेदार थे।”
India’s IT ministry banned Telegram for one week because some users shared leaked exam questions.
This punishes 150M+ ordinary Telegram users in India — not the insiders who leaked the exam materials.
And the ban hasn't stopped anything. The leaks just moved to other apps. https://t.co/CzQWN4mXfb
— Pavel Durov (@durov) June 16, 2026
इस मामले में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि यह कार्रवाई सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास टेलीग्राम के व्यापक दुरुपयोग से जुड़े पर्याप्त सबूत हैं।
सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि कुछ चैनल्स को बंद किए जाने के बाद वे नए नामों से फिर सक्रिय हो जाते थे। इन चैनलों के जरिए कथित पेपर लीक के नाम पर QR कोड के माध्यम से पैसे वसूले जाने के भी आरोप हैं।
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नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई किसी नए पेपर लीक की वजह से नहीं की गई है, बल्कि परीक्षा को प्रभावित करने वाले संगठित चीटिंग रैकेट और फर्जी मैसेजों को रोकने के लिए की गई है।
NTA के डायरेक्टर जनरल अभिषेक सिंह ने कहा कि सरकार किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं होने देगी और परीक्षा को निष्पक्ष और सुरक्षित तरीके से आयोजित कराने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि यह कदम उम्मीदवारों में फैल रही गलत जानकारी और मानसिक तनाव को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। सरकार ने साफ किया कि उसका उद्देश्य परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
Location : New Delhi
Published : 18 June 2026, 11:31 AM IST