
फर्जी सिम कार्ड बेचने वालों पर शिकंजा (Img- Pinterest)
New Delhi: आज के दौर में मोबाइल नंबर सिर्फ बातचीत का जरिया नहीं, बल्कि आपके बैंक अकाउंट, UPI और पर्सनल डेटा की चाबी है। इसी डिजिटल पहचान को सुरक्षित बनाने और फर्जी आईडी पर सिम बांटने वाले गिरोहों को खत्म करने के लिए दूरसंचार विभाग (DoT) ने बड़ा कदम उठाया है।
अब नया सिम कार्ड खरीदने के लिए सिर्फ कागजी दस्तावेज देना काफी नहीं होगा, बल्कि उपभोक्ता को फिंगरप्रिंट, फेशियल रीकग्निशन या आंखों की पुतली (Iris) का बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन कराना अनिवार्य होगा।
DoT का यह सख्त आदेश केवल नया सिम खरीदने वालों पर ही नहीं, बल्कि मौजूदा यूजर्स पर भी लागू होगा। यदि कोई यूजर अपने सिम की जानकारी अपडेट कराता है, सिम बंद करवाता है या नया डुप्लिकेट सिम निकलवाता है, तो उसे भी इस बायोमेट्रिक प्रक्रिया से गुजरना होगा। इस कदम से सिम स्वैपिंग (SIM Swapping) और फर्जी पहचान के आधार पर चलाए जा रहे अवैध नंबरों पर पूरी तरह से लगाम लगेगी।
दूरसंचार विभाग ने व्यक्तिगत सिम इस्तेमाल करने की सीमा भी दोबारा तय की है। नए नियमों के तहत कोई भी व्यक्ति अपने नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन ही रख सकता है। वहीं जम्मू-कश्मीर, असम और उत्तर-पूर्वी राज्यों के निवासियों के लिए यह सीमा 6 सिम कार्ड की तय की गई है। टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसे ग्राहकों की पहचान करें जिनके पास तय लिमिट से ज्यादा सिम हैं, ताकि अतिरिक्त नंबरों को तुरंत बंद किया जा सके।
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दूरसंचार विभाग का मानना है कि बायोमेट्रिक सिस्टम लागू होने से सिम जारी करने की प्रक्रिया 100% पारदर्शी और सुरक्षित हो जाएगी। इससे साइबर अपराधों के लिए फर्जी नंबरों का इस्तेमाल करने वाले गिरोहों का नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगा और आम नागरिकों का डिजिटल लेन-देन सुरक्षित रहेगा।
Location : New Delhi
Published : 22 August 2026, 5:01 PM IST